Skip to content
SarvaKosh
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)

Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)

Devanagarihipublished94 pages

Page 24 of 94

Read in context
Page 24

(स्वरोदय विज्ञान)

(७)

तत्त्व पहचानने की एक सरल विधि और भी है। पाँच गोली पाँच तत्त्वों के रंग की बनवाले। सदा उनको अपने जेब में रखें। जब कभी आपकी इच्छा यह जानने की हो कि कौन सा तत्त्व चल रहा है तो आंखें बन्द करके और मन को एकाग्र करके जेब में से एक गोली निकाल लें। बहुधा उसी रंग की गोली निकलेगी, जिस रंग का तत्त्व उस समय चल रहा होगा। यदि नेत्र बन्द कर लिये जावें तो अंधेरे में जो रंग दिखाई देता है – उसका ध्यान पूर्वक देखने से भी तत्त्व को पहचान हो सकती है। परीक्षा के लिये अपने किसी मित्र से कहे कि, कोई रंग वह अपने मन में ले ले। अब तुम यह पता लगाओ कि तुम्हारा कौन सा तत्त्व चल रहा है। जो तत्त्व चल रहा होगा वही रंग उसने अपने मन में लिया होगा। पहले पहल गलती अवश्य होगी, परन्तु अभ्यास से ठीक रंग का पता लग जावेगा। अभ्यास से यह बतलाना, कि अमुक मनुष्य ने आज क्या खाया है, मामूली बात हो जाती है।

स्वरों के स्वामी, दिन, और राशियां

स्वरों का सम्बन्ध राशि, नक्षत्र और दिन, तीनों से है। प्रश्न पूछने के समय वह बहुत काम आता है। इडा स्वर का स्वामी चन्द्रमा है – यह स्थिर है। पिङ्गला स्वर का स्वामी सूर्य है – यह चर है। सुषुम्णा चर और स्थिर दोनों स्वभाव अपने में रखता है। इडा, शीतल, पिङ्गला गर्म और सुषुम्णा सम-शीतल है। इडा का स्वामी, कई हिन्दू ग्रंथकारों ने ब्रह्मा, पिंगला का शिव और सुषुम्णा का विष्णु लिखा है। सोमवार बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार चन्द्र स्वर के दिन हैं। शनि, रवि, मंगल, – ये सूर्य स्वर के दिन हैं।

मंगल अरु इतवार दिन और शनिश्चर लीन।

शुभकारज को मिलते हैं सूरज के दिन तीन।

सोमवार शुक्कर भलौ, दिन बृहस्पति को देख।