Skip to content
SarvaKosh
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

by आचार्य चतुरसेन शास्त्री

Source: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (origin)

DevanagariHindipublished222 pages

Page 18 of 222

Read in context
Page 18

१३

दिन और रात के काम

को इस दृष्टि से आवश्यक लेना चाहिए कि मैला उनकी जननेन्द्रिय की ओर न लग जाय। उन्हें गुदा-द्वार साफ करने के बाद भली भाँति जननेन्द्रिय को भी पानी से साफ करना चाहिए। तन्दुरुस्त आदमी का मल वैधा हुआ, चिकना और अक्सर पीला होता है और एक ही बार में आसानी से निकल जाता है, कोठा साफ और हलका हो जाता है। सुबह का पेशाब भी हल्का-साफ सुनहरे रङ्ग का होता है।

मिट्टी से और मिल सके तो साबुन से अच्छी तरह हाथ साफ करके मुँह धोना और कुल्हा-दाँत करना चाहिए। इस काम में सबसे ज्यादा ध्यान देने की बात दाँतन या मंजन है। हरेक तन्दुरुस्त आदमी के दाँत मोती से साफ और चमकदार और लोहे के समान मजबूत होने चाहिए। यह तभी हो सकता है जब वे साफ रहेंगे। क्योंकि दाँत गन्दे रहने से दाँतों की जड़ में कीड़ा लग जाता है। खाना खाने के बाद अच्छी तरह कुल्हा न करने से उनकी दराजों में अन्न का जूठन लगा रह जाता है जो रात को सड़ जाता है। सुबह यदि दाँत ठीक तौर पर साफ न किये गये तो कीड़ा बनकर दाँतों की जड़ों को सड़ा डालता है। दाँतम नीम, चतुल, खैर, महुआ, मौलासिरी की करनी चाहिए। वह कनी उँगली के बराबर मोटी और बारह अंगुल लम्बी होनी चाहिए। दाँतन इस होशियारी से दाँतों पर रगड़ना चाहिए कि जिससे मसूड़े छिल न जायें। दाँतन कर चुकने पर उसे चौरकर उससे जीभ साफ करनी चाहिए। दाँतन अगर