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सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

by आचार्य चतुरसेन शास्त्री

Source: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (origin)

DevanagariHindipublished222 pages

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दिन और रात के काम

हर एक तन्दुरुस्त आदमी को ४ बड़ी रात रहते जागना और जागना परमेश्वर का नाम लेना चाहिए। फिर फौरन बिस्तर छोड़कर पाखाने जाना चाहिए।

अगर गाँव बस्ती हो तो १ मील दूर जंगल में जाना चाहिए। यदि घर में पाखाने हों और वे पक्के हों तो किनाइल से धुलने चाहिए और कबे हों तो साफ होने के बाद उन शौच में सूखी मिट्टी डाल देना चाहिए। पाखाने जाने के बाद मैले पर राख छिड़क देना चाहिए, जिससे मक्खी न बैठें और बदबू न फैले। आब-दस्त के लिए कम-से-कम १॥ सेर पानी जरूर लेजाना चाहिए। पानी ताजा रहना चाहिए। कारिग होने पर अच्छी तरह उंगली से गुदा के भीतर तक सफाई करनी चाहिए। जिससे मल गुदा में लगा न रह जाय। लिङ्गेंद्रिय की खाल को उलटकर उसका मैल खूब अच्छी तरह साफ करना चाहिए। ऐसा न करते से प्रमेह की बीमारी हो जाती है। स्त्रियों