श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
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The Hindu Philosophy of Life, Ethics and Religion
ॐ तत्सत् ।
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य
अथवा
कर्मयोगशास्त्र
गीताकी बहिरंगपरीक्षा, मूल संस्कृत श्लोक, भाषा-अनुवाद, अर्थ-
निर्णायक टिप्पणियाँ, पूर्वी और पश्चिमी मतोंकी तुलना, इत्यादिसहित ।
लेखक
लो. बाल गंगाधर तिलक
अनुवाद
श्रीमान् माधवरावजी सप्रे
70833
बीसवाँ संस्करण
तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर ।
असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः ॥
- गीता ३.१९
शके १९०४ : सन् १९८२
मूल्य ७५ रुपये