श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)
Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)
by श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
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परिच्छेद ८२
सुरेन्द्र के घर में महोत्सव
(१)
श्रीयुत सुरेन्द्र के बगीचे में
आज श्रीरामकृष्ण सुरेन्द्र के बगीचे में आये हैं। रविवार, ज्येष्ठ कृष्ण ६, १५ जून १८८४। श्रीरामकृष्ण आज सुबह नौ बजे से भक्तों के साथ आनन्द मना रहे हैं।
सुरेन्द्र का बगीचा कलकत्ते के पास काकुड़गाछी गाँव में है। उसके पास ही राम का बगीचा भी है जिसमें करीब छः महीने पहले श्रीरामकृष्ण पधारे थे। आज सुरेन्द्र के बगीचे में महोत्सव है।
सुबह से ही संकीर्तन होने लगा है। कीर्तनिये कृष्ण और गोपियों के सम्बन्ध में कीर्तन गा रहे हैं। गोपियों का प्रेम, कृष्ण के विरह से राधिका की अवस्था – यही सब गाया जा रहा है। श्रीरामकृष्ण को क्षण क्षण में भावावेश हो रहा है। भक्तगण उद्यानगृह के भीतर चारों ओर कतार बाँधे खड़े हैं।
उद्यानगृह में जो कमरा सब से बड़ा है, उसी में कीर्तन हो रहा है। जमीन पर सफेद चद्दर बिछी हुई है। जगह-जगह पर तकिये भी लगे हैं। इस कमरे के पूर्व और पश्चिम ओर एक एक कमरा और उत्तर और दक्षिण ओर बरामदे हैं। उद्यानगृह के सामने अर्थात् दक्षिण की ओर एक तालाब है, पक्का घाट भी बँधा हुआ है। गृह और तालाब के बीच से पूर्व-पश्चिम की ओर रास्ता है। रास्ते के दोनों तरफ फूल और क्रोटन आदि के पेड़ लगे हैं। उद्यानगृह के पूर्व तरफ से उत्तर के फाटक तक एक और रास्ता गया है। उसके भी दोनों ओर अनेक प्रकार की फूल-पत्तियों के पेड़ लगे हैं। फाटक के पास और रास्ते के पूर्व ओर एक और तालाब है – उसमें भी पक्का घाट है। यहाँ गांव के साधारण आदमी नहाया करते हैं और पीने के लिए पानी भी इसीसे ले जाते हैं। उद्यानगृह के पश्चिम की ओर भी रास्ता है, उसके दक्षिण-पश्चिम में रन्धनगार है। आज यहाँ खूब धूम है, यहाँ श्रीरामकृष्ण और भक्तों की सेवा होगी। सुरेश और राम प्रत्येक समय सब तरह की देखभाल कर रहे हैं।
उद्यान-गृह के बरामदे में भी भक्तों का समावेश हुआ है। कोई-कोई अकेले कोई
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