Skip to content
SarvaKosh
श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

by श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

Public domain in India · Report a copyright issue

DevanagariHindipublished711 pages

Page 512 of 711

Read in context
Page 512
५ अप्रैल, १८८४परिच्छेद ७९४८९

“तुम्हारी क्या इस समय तीर्थ जाने की इच्छा है?”

बूढ़े गोपाल – जी हाँ, जरा देखभाल आयें।

राम – (बूढ़े गोपाल से) – ये कहते हैं, बहूदक के बाद कुटीचक की अवस्था होती है। जो साधु अनेक तीर्थों का भ्रमण करते हैं, उनका नाम है बहूदक, और जो एक जगह डटकर आसन जमा देते हैं उन्हें कुटीचक कहते हैं।

“एक बात और ये कहते हैं। एक पक्षी जहाज के मस्तूल पर बैठा था। जहाज गंगा से होकर काले पानी में (समुद्र में) चला गया। पक्षी को इसका होश न था। जब वह होश में आया, तब किनारे का पता लगाने के लिए उत्तर की ओर उड़ गया। परन्तु उसने किनारा कहीं न देखा, तब लौट आया। फिर जरा देर विश्राम करके दक्षिण की ओर गया। उधर भी किनारा न दीख पड़ा। इसी तरह कुछ-कुछ विश्राम करके पूर्व और पश्चिम में भी गया। जब उसने देखा, कहीं किनारा नहीं है, तब मस्तूल पर आकर चुपचाप बैठ गया।”

श्रीरामकृष्ण – (बूढ़े गोपाल और भक्तों से) – जब तक यह बोध है कि ईश्वर वहाँ है – वहाँ है, तब तक अज्ञान है। जब यहाँ है, यह बोध हो जाता है, तब ज्ञान।

“एक आदमी तम्बाकू पीना चाहता था। वह अपने पड़ोसी के घर गया – टिकिया सुलगाने के लिए। घर के सब लोग सो गये थे। बड़ी देर तक दरवाजा खटखटाने पर एक आदमी खोलने के लिए नीचे उतर आया। उस आदमी को देखकर घरवाले ने पूछा, कहो, कैसे आये? उसने कहा, क्या कहूँ कैसे आया। जानते तो हो कि तम्बाकू पीने का चस्का है, टिकिया सुलगाने आया था। तब घरवाले ने कहा अजी वाह, तुम तो बड़े भले मानस निकले, इतनी मेहनत करके आये और दरवाजा खटखटाया, तुम्हारे हाथ में लालटेन जो है! (सब हँसते हैं।)

“जो कुछ चाहता है, वही उसके पास है, फिर भी आदमी अनेक स्थानों में चक्कर लगाया करता है।”

राम – महाराज, अब इसका मतलब समझ में आ गया। समझा कि गुरु क्यों कहते हैं कि चारों धाम करके आ जाओ। जब एक बार चक्कर मारकर देखता है कि जो कुछ यहाँ है, वही सब वहाँ भी है, तब फिर वह गुरु के पास लौटकर आता है। यह सब केवल गुरु की बात पर विश्वास होने के लिए है।

बात कुछ रुक गयी। श्रीरामकृष्ण राम की तारीफ कर रहे हैं।

श्रीरामकृष्ण – (भक्तों से) – अहा! राम में कितने गुण हैं। कितने भक्तों की सेवा और उनका पालन-पोषण करता है। (राम से) अधर कहता था, तुमने उसकी बड़ी खातिरदारी की – क्यों, ठीक है न?

अधर शोभाबाजार में रहते हैं। श्रीरामकृष्ण के परमभक्त हैं। उनके यहाँ चण्डी के गीत हुए थे। श्रीरामकृष्ण और भक्तों में से कितने ही वहाँ गये थे। परन्तु अधर राम को