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श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

by श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

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DevanagariHindipublished711 pages

Page 367 of 711

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Page 367

३४४ | श्रीरामकृष्णवचनामृत | २८ नवम्बर, १८८३

रहे हैं - वे आ रहे हैं या नहीं।

शाम हो आयी, पाँच बज गए। इसी समय श्रीरामकृष्ण की गाड़ी भी आ पहुँची। साथ लाटू तथा दो-एक भक्त और भी हैं। राखाल भी आये हैं।

केशव के घर के आदमी आकर श्रीरामकृष्ण को अपने साथ ऊपर ले गए। बैठकखाने के दक्षिण ओरवाले बरामदे में एक पलंग रखा हुआ था। उसी पर श्रीरामकृष्ण को उन्होंने बैठाया।

(२)

समाधिस्थ श्रीरामकृष्ण। जगन्माता के साथ वार्तालाप

श्रीरामकृष्ण बड़ी देर से बैठे हुए हैं। आप केशव को देखने के लिए अधीर हो रहे हैं। केशव के शिष्यगण विनीत भाव से कह रहे हैं कि वे अभी थोड़ा विश्राम कर रहे हैं, थोड़ी ही देर में आनेवाले हैं।

केशव की पीड़ा इतनी बढ़ी हुई है कि दशा संकटापन्न हो रही है। इसीलिए उनकी शिष्यमण्डली और घरवाले इतनी सावधानी से काम कर रहे हैं। परन्तु श्रीरामकृष्ण केशव को देखने के लिए उत्तरोत्तर अधीर हो रहे हैं।

श्रीरामकृष्ण (केशव के शिष्यों से) - क्यों जी, उनके आने की क्या आवश्यकता है? मैं ही क्यों न भीतर चला जाऊँ?

प्रसन्न (विनयपूर्वक) - अब वे थोड़ी ही देर में आते हैं।

श्रीरामकृष्ण - जाओ, तुम्हीं लोग ऐसा कर रहे हो। मैं भीतर जाता हूँ।

प्रसन्न - श्रीरामकृष्ण को बातों में बहलाने के इरादे से केशव की बातें कह रहे हैं।

प्रसन्न - उनकी अवस्था एक दूसरे ही प्रकार की हो गयी है। आपकी ही तरह माँ के साथ बातचीत करते हैं। माँ जो कुछ कहती हैं, उसे सुनकर कभी हँसते हैं और कभी रोते हैं।

केशव जगन्माता के साथ बातचीत करते हैं, हँसते हैं, रोते हैं, यह सुनते ही श्रीरामकृष्ण भावावेश में आ गए। देखते ही देखते समाधिस्थ हो गये।

श्रीरामकृष्ण समाधिस्थ हैं। जाड़े का समय है, हरी बनात का कुर्ता पहने हुए हैं। ऊपर से एक शाल डाले हुए हैं। उन्नत देह, दृष्टि स्थिर हो रही है। बिलकुल ही मग्न हैं। बड़ी देर तक यह अवस्था रही। समाधि छूटती ही नहीं।

सन्ध्या हो आयी। श्रीरामकृष्ण कुछ प्रकृतिस्थ हुए। पास के बैठकखाने में दीप जलाया जा चुका है। श्रीरामकृष्ण को उसी कमरे में बिठाने की चेष्टा की जा रही है।

बड़ी कठिनाई से लोग उन्हें बैठकखाने के कमरे में ले गए।

कमरे में बहुतसी चीजें हैं - कोच, टेबिल, कुर्सी, गैसबत्ती आदि। श्रीरामकृष्ण को