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सर्वकोश
श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

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३३४ श्रीरामकृष्णवचनामृत १६ अक्टूबर, १८८३

ईशान के चले जाने पर श्रीरामकृष्ण मास्टर के साथ एकान्त में बात कर रहे हैं; पूछ रहे हैं, “नरेन्द्र, राखाल, अधर, हाजरा, ये लोग तुम्हें कैसे लगते हैं, सरल हैं या नहीं? और मैं तुम्हें कैसा लगता हूँ?” मास्टर कह रहे हैं, “आप सरल हैं, फिर गम्भीर भी! आपको समझना बहुत कठिन है!” श्रीरामकृष्ण हँस रहे हैं।

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