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स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

Spanda Nirnaya of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary

by आचार्य वसुगुप्त / क्षेमराज

DevanagariHindipublished519 pages

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Page 10

विषयानुक्रमणिका
भूमिका खण्ड
परिचय एवं पृष्ठभूमि
पृष्ठाङ्क
[१] काश्मीरीय शैवाद्वैत एवं स्पन्दमत १४
[२] स्पन्दसूत्र एवं स्पन्द १६
[३] स्पन्द १८
स्पन्दसूत्र एवं शिवसूत्र २१
शैव दर्शन एवं उसकी साम्प्रदायिक परम्परा २१
स्पन्दशास्त्र और उसके सिद्धान्त २४
१. सर्वशक्तिवाद २५
२. अजातिवाद एवं उदयवाद २६
३. क्रीडावाद २६
४. संकल्पसृष्टिवाद २७
५. इच्छासृष्टिवाद २७
६. स्वातंत्र्यवाद २७
७. द्वयात्मक अद्वयवाद २७
८. सर्वविमर्शवाद २७
९. स्वस्वभाववाद २८
१०. अद्वैतवाद २८
स्वस्वरूपवाद ३०, अनुग्रहवाद ३०, संकल्पवाद ३२, भोगापवर्ग-
साहचर्यवाद ३३, जीवन्मुक्तिवाद ३४, सर्वचैतन्यवाद ३४, सर्व-
चिन्मयतावाद ३४, विश्वात्मवाद ३५, सर्वात्मवाद ३५, क्रीडावाद
३८, लीलावाद, चित्रवाद ३८, अहंतावाद ३८, लीलात्मक
विनोदवाद ३९, स्वभाववाद ३९, सर्वात्मवाद ३९, अहन्तावाद
३९, नादसृष्टिवाद ४५, सर्वशिववाद ४५, अद्वैतवादी काश्मीरीय
शैव दर्शन का उद्देश्य ४५, सर्वात्मवाद ४६, इच्छा-ज्ञान-क्रियाभेद-
वाद ४६, शब्दसृष्टिवाद ४६, वाक्तत्त्व अहन्ता एवं विश्व में तादात्म्य
४९, नादसिद्धान्त ४९, अद्वैतवादी दृष्टि का वैलक्षण्य ५०