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सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

by श्रीमदप्पय्य दीक्षित

Source: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (origin)

DevanagariHindipublished590 pages

Page 50 of 590

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Page 50

२२ | सिद्धान्तलेशसंग्रह | [ प्रथम परिच्छेद


अथवा गुरुमुखाधीनाध्ययनादिव निपुणस्य स्वप्रयत्नमात्रसाध्यादपि वेदान्तविचारात् सम्भवति सत्तानिश्चयरूपं ब्रह्मापरोक्षज्ञानम्, किन्तु गुरुमुखाधीनवेदान्तवाक्यश्रवणनियमादृष्टमविद्यानिवृत्तिं प्रति कल्मषनिरासेनोपयुज्यत इति तदभावेन प्रतिवद्धमविद्यामनिवर्तयत् परोक्षज्ञानकल्पमवतिष्ठते। न च ज्ञानोदये अज्ञानानिवृत्त्यनुपपत्तिः, प्रतिबन्धकाभावस्य सर्वत्राऽपेक्षितत्वेन सत्यपि प्रत्यक्षविशेषदर्शने उपाधिना प्रतिबन्धात् प्रति-


अथवा गुरुमुखसे किये गये वेदान्तविचारके समान व्युत्पन्न पुरुषको केवल अपने प्रयत्नसे किये गये वेदान्तविचारसे भी सत्तानिश्चयरूप ब्रह्मके अपरोक्ष—साक्षात्कारका सम्भव है, परन्तु गुरुमुखसे किये गये वेदान्तवाक्योंके श्रवणसे उत्पन्न हुआ नियमापूर्व कल्मषनिवृत्तिपूर्वक अविद्याकी निवृत्तिके प्रति उपयोगी है, इससे यदि गुरु द्वारा वेदान्तश्रवण न किया जाय—अपने प्रयत्नसे ही किया जाय, तो वेदान्तश्रवणसे कल्मषोंकी निवृत्ति नहीं होगी, अतः कल्मषोंसे प्रतिवद्ध होनेसे अपने प्रयत्नसे किया हुआ निपुणपुरुषका सत्तानिश्चात्मक अपरोक्ष—साक्षात्कार अविद्याकी निवृत्ति न करता हुआ परोक्षज्ञानके सदृश* ही स्थित रहेगा। परन्तु यह असङ्गत है, क्योंकि अज्ञानके उत्पन्न होनेपर अविद्या निवृत्त न हो, यह अनुपपन्न है अर्थात् ज्ञानसे अवश्य ज्ञानकी निवृत्ति होती है, [ कारण कि जो प्रमा होती है वह अपने अज्ञाननिवृत्तिरूपकार्यको उत्पन्न करती ही है, जैसे शुक्तिप्रमासे उसका अज्ञान नष्ट होता है।] नहीं, यह नियम नहीं है कि ज्ञान होनेपर अज्ञान निवृत्त होता है, क्योंकि प्रतिबन्धकके अभावकी † सर्वत्र अपेक्षा होनेसे प्रत्यक्षसे विशेषदर्शनके रहते भी


* यहाँपर मतभेदसे व्यवस्था करनी चाहिए, किसी आचार्यके मतमें नियमादृष्ट कल्मषनिवृत्ति द्वारा ज्ञानोत्पत्तिमें कारण है और किसी आचार्यके मतमें नियमादृष्ट कल्मषनिवृत्ति द्वारा अविद्यानिवृत्तिमें कारण है—अन्यथा पूर्व ग्रन्थमें 'नियमार्थवत्त्वाय' इत्यादिसे कल्मषनिवृत्ति द्वारा ज्ञानकी उत्पत्तिमें नियमादृष्टको कारण बतलाया है और यहाँपर नियमादृष्टको प्रतिबन्धरूप कल्मषकी निवृत्ति द्वारा उत्पन्न ज्ञानसे जननीय अविद्याकी निवृत्तिमें कारण बतलाया है, इससे विरोधका प्रसङ्ग अवश्य आ सकता है।

† यद्यपि वेदान्तसिद्धान्तमें प्रतिबन्धकाभाव कारण नहीं माना गया, तथापि 'अप्रतिबद्ध सामग्री कार्यकी हेतु है' इसका स्वीकार होनेसे विशेषणरूपसे प्रतिबन्धकाभावकी अपेक्षा है, क्योंकि सामग्रीमें अप्रतिबद्ध यह विशेषण है, और इसका अर्थ है—प्रतिबन्धकाभावसहकृत सामग्री, इसलिए विशेषणविधया उसकी अपेक्षा है, यह भाव है—