सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)
Siddhanta Lesha Sangraha Hindi
by श्रीमदप्पय्य दीक्षित
Source: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (origin)
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Read in context| १६४ | सिद्धान्तलेशसंग्रह | [ प्रथम परिच्छेद |
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न चाऽनावरकाज्ञानशेषो मुक्तौ प्रसज्यते ।
मूलाज्ञानच्छिदा छेद्यास्तदवस्था इमा यतः ॥ ७९ ॥
मुक्ति अवस्थामें आवरण न करनेवाले अज्ञानोंका अवशेष प्रसक्त नहीं होता, क्योंकि उस दशामें मूलाज्ञानका विनाश होनेसे अवस्थारूप अज्ञान भी विनष्ट होते हैं ॥७९॥
न चैवं ब्रह्मावगमोत्पत्तिकालेऽनावरकत्वेन स्थितानामज्ञानानां ततोऽप्यनिवृत्तिप्रसङ्गः । तेषां साक्षाद्विरोधित्वाभावेऽपि तन्निवर्त्यमूलाज्ञानपरतन्त्रतया अज्ञानसम्बन्धादिवत् तन्निवृत्त्यैव निवृत्त्युपपत्तेः । एतदर्थमेव तेषां तदवस्थाभेदरूपतया तत्पारतन्त्र्यमिष्यत इति ।
यदि सर्वदा सब अज्ञान आवारक न हों, तो ब्रह्मज्ञानके उत्पत्तिकालमें अनावारक ( आवरण नहीं करनेवाले ) रूपसे विद्यमान अज्ञानोंकी ब्रह्मज्ञानसे भी निवृत्ति नहीं होगी, [ भाव यह है कि ब्रह्मज्ञानके उत्पत्तिकालमें मूूल अज्ञानके समान अवस्थाऽज्ञान भी ब्रह्मचैतन्यको विषय प्रदेशमें आवृत करके रहेंगे, तो ब्रह्मज्ञानसे ब्रह्मविषयक मूलाज्ञानकी नाईं उन चैतन्यके आवारक अवस्थारूप अज्ञानोंकी भी निवृत्ति होगी, यदि अवस्थारूप अज्ञान आवारकरूप नहीं होंगे, तो उनकी निवृत्ति नहीं होगी, क्योंकि समानविषयमें ज्ञानाज्ञानका निवर्त्यनिवर्तकभाव होनेसे ब्रह्मज्ञानका समानविषयक अवस्थारूप अज्ञान नहीं है ] । नहीं, ब्रह्मज्ञानसे अवस्थारूप अज्ञानोंकी भी निवृत्ति होगी, क्योंकि अवस्थारूप अज्ञानोंके साक्षात् ब्रह्मज्ञानके विरोधी न होनेपर भी वे ( अवस्थारूप अज्ञान ) ब्रह्मज्ञानसे निवृत्त होनेवाले मूलाज्ञानके परतन्त्र अधीन हैं, इसलिए जैसे अज्ञानकी निवृत्ति होनेपर अज्ञानपरतन्त्र चैतन्य और अज्ञानके सम्बन्धकी निवृत्ति होती है, वैसे ही अज्ञानकी निवृत्तिसे ही अवस्थारूप अज्ञानकी भी निवृत्ति होती है। जैसे अज्ञानकी निवृत्तिसे संसारकी निवृत्ति होनेसे संसार अज्ञानपरतन्त्र माना जाता है, वैसे ही अज्ञानकी निवृत्तिसे अवस्थारूप अज्ञानके निवृत्त होनेसे घटादिविषयक अज्ञान, मूलाज्ञानके अवस्थाविशेषरूप होनेसे, मूलाज्ञानके अधीन माने जाते हैं।
तया' इत्यादिसे जो पूर्वमें दृष्टान्त दिया गया है, वह नहीं घटता है, इसी अस्वरससे यह 'अन्ये तु' मत है।