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सर्वकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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( २६ )
जैसे प्रथम पक्ष में २ य² है अतः २ × ४ = ८ से दोनों पक्षों को गुणा करने से
तथा व्यक्त ( ९ )² = ८१ दोनों पक्षों में जोड़ने से १६ य² + ७२ य = १४४,
१६य² - ७२ य + ८१ = ∴ १४४ + ८१ = २२५
अतः १६ य² + ७२ य - ८१ = २२५
मूल = ४ य - ९ = १५ आलाप से
४ य = २४ ७२ ÷ २ = √ ३६ = ६ = मालती पुष्प में
∵ य = ६ ७२ × ८/९ = ६४ = अलिनी " "
∴ य² = ३६ दृश्य = २ = प्रत्यक्ष दृष्टि में
──────────────────────────────────
अतः २ य² = ७२ योग = ७२
= भ्रमर कुल होता है ।
“शून्ये गुणके जाते खं हारश्चेत्पुनस्तदा राशिः ।
अविकृत एव विचिन्त्यः सर्वत्रैवं विपश्चिद्भिः ॥”
यदि किसी समीकरण में गुणक ० और भाजक भी ० है तो