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सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

पृष्ठ 20, कुल 723 में से

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( १३ )
गणित का यह निम्न उदाहरण यदि प्रक्षिप्त है तो भी तथा कुछ विद्वान् इस पद्य
गणित को भास्कराचार्य की ही कृति कहते हैं ।
६—कामिन्या हारवत्याः सुरतकलहतो मौक्तिकानां त्रुटित्वा ।
प्राप्तः षष्ठः सुकेश्या गणक दशमकः संगृहीत प्रियेण ॥ इत्यादि
हे गणितज्ञ ! सुरत कलह में किसी कामिनी की मोतीमाला के टूट जाने से उस
का १/३ जमीन पर १/५ विस्तर पर और १/६ कामिनी को, १/१० स्वामी ( पतिको और शेष
६ तागे में गुथे रह गये तो मोती संख्या क्या थी ? क्या इस प्रकार के प्रश्नोत्तर
लड़की को पढ़ाये या लड़की से पूछे जा सकते हैं ।
७—"बाले ! मरालकुल मूल दलानि समतीरे" इत्यादि
हे बाले ! किसी सरोवर के हंस समूह का ७/२ क्रीडा की थकावट के शिथिलगमन से
सरोवर के तट पर देखा गया, शेष हंसों को जल में क्रीडा कलह करते देखा गया तो हंस
कुल का प्रमाण संख्या क्या है ? मूल संख्या का गुणक ७/२ और दृश्य = २, गणित क्रिया
से ५६/१६ में + २ गुणकार्थ ७/२ × १/२ = ७/४ का वर्ग ४९/१६ में दृश्य २ का योग ८१/१६ का मूल =
९/४ में गुणकार्थ ७/४ + जोड़ने से १६/४ = ४ का वर्ग = १६ हंस संख्या यही हंस कुल
प्रमाण होता है ।
८—पुनश्च लड़की से नहीं स्त्री से ही प्रश्न और गणित कौशल सूचक उदाहरण
और क्रिया —
वर्षा ऋतु के समय हे बाले ! हंस कुल का दश गुणित मूल मानस सर में
और उसी का १/८ जल के किनारे से उड़कर स्थल कमलिनी वन में, शेष ३ हंस
का जोड़ा ( = ६ ) कोमल कमलनाल सुशोभित जल में क्रीड़ा की लालसा के देखे
गये तो हंस संख्या क्या है ?
उत्तर १ - १/८ = ७/८ । ६ ÷ ७/८ = ४८/७ = नूतन दृश्य, तथा १० ÷ ७/८ = ८०/७ नया
गुणांक, ८०/७ ÷ २ = ४०/७ का वर्ग = १६००/४९ में ४८/७ को जोड़ने से १९३६/४९ का मूल
= ४४/७ अतः ४०/७ + ४४/७ = ८४/७ = १२ का वर्ग हंस कुल प्रमाण = १४४ होता है ।
९—अपि च स्त्री से सम्बन्धित गणित और उत्तर—
अलिकुलदलमूलं मालती यातभृङ्गौ —
निखिल नवम भागाश्चालिनीं भृङ्गमेकम्
निशिपरिमललुब्धं पद्ममध्ये निरुद्धम्
रणति प्रति रणन्तं ब्रूहि कान्ते ! ऽलिसंख्याम् ।
हे कान्ते ! भ्रमर झुण्ड का १/९ भाग तथा झुण्ड का १/२ के मूल के बराबर मालती
पुष्प पर गये, सुगन्धि के प्रलोभन से कमल पुष्प कोश में ग