Skip to content
SarvaKosh
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

by भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी)

DevanagariHindipublished723 pages

Page 16 of 723

Read in context
Page 16

यद्यपि शंख, चक्र, गदा और पद्म चार आभूषणों १, २, ३, ४ से युक्त-भगवान्
विष्णु का १ ही रूप होता है। यदि अन्योन्य हाथों में शंख, गदा, चक्र और पद्म को
धारण किया जाय तो भगवान् विष्णु के अखंड १ रूप से अन्य कितने रूप हो सकते हैं
इन रूपों को भी गणित से निम्न भाँति जाना जा सकता है।
आभूषण संख्या = १, २, ३, ४
अतः १ x २ x ३ x ४ = २४ भेद या भगवान विष्णु के २४ अवतार हो जाते हैं।
इसी प्रकार भगवान शंकर के प्रसिद्ध १० आसन या आभूषण धारण की स्थायी
स्थिति में सभी आभूषणों का अन्योऽन्य हस्त परिवर्तन से धारण परिवर्तन किया जाय तो
अखण्ड एक रूप के अतिरिक्त भगवान शङ्कर के कितने रूप हो सकते हैं ?
चूंकि भगवान शङ्कर के दश हाथों में (१) पाश, (२) अङ्कुश, (३) सर्प, (४) डमरू,
(५) कपाल, (६) त्रिशूल, (७) खट्वाङ्ग, (८) शक्ति, (९) शर और (१०) धनुष को
प्रत्येक हाथ से बदल बदल कर रखने से भगवान शङ्कर के १x२x३x४x५x६x७x८x
९x१० = ३६२८८०० (छत्तीस लाख अठाईस हजार आठ सौ) रूप होते हैं, यह कैसे ?
इत्यादि भेदों को सुविधा से समझने के लिये एक छोटे से उदाहरण ८२, और २८ = २८
३, ९, ८ अङ्कों से बनी संख्याओं को कितने बार लिख सकते हैं और उनका योग भी
क्या होगा ? यह एक प्रश्न है।
यह छोटा अङ्क जैसे २८ है तो इसे हम २८ और ८२ भी लिखकर इस अंक के
भेद = २ और भेद के अंकों का योग = ८२ + २८ = ११० योग कह सकते हैं।
जैसे यहाँ पर, अंक २ हैं जिनका योग = १० है, इसलिये १ x २ = २ स्थान = भेद—
आगे सूत्र से, (भेद x स्थान / अंकमान) अंकभेद = १ x २ = २, अङ्कयोग = ८ + २ = १०,
अङ्कमान ८२ = २ ही अङ्क है।
इसलिये (अंकभेद x अंकयोग / अंकस्थान) = २x१० / २ = १० को एक स्थान दाहिनी तरफ बढ़ा-
कर लिखने से १० / ११० यही अंकभेद और उनका योग हो जाता है। छोटा अंक होने से
स्पष्ट समझ में आ जाता है। २८ की तरह और ८२ की तरह लिख सकते हैं और
२८ + ८२ का योग उक्त ११० तुल्य हो जाता है।
भगवान विष्णु के रूप भेद = १ x २ + ३ x ४ = २४ अंक योग = १० और अंक-
मिति = ४। इसलिए सूत्र से २४ x १० / ४ = ६० को ४ जगह दाहिने एक स्थान बढ़ाकर
लिखने से—