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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

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DevanagariHindipublished526 pages

Page 66 of 526

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Page 66

( १६ )

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
मोतियों की मूल्य-कल्पना२१३काष्ठ आदि से कर लेने के प्रकार का निर्देश२१९
मोती के भेद और लक्षण२१४भूमिभागादि को तत्काल लेने का निर्देश२२०
सुवर्णादि सात धातुओं का निर्देश”किसान को भागपत्र लिख देने का एवं ग्राम के किसी धनी को प्रतिभू बनाकर उसी से कर लेने का निर्देश”
सुवर्णादि ७ धातुओं के तरतम भाव”क्वचित् कर लेने के निषेध का निर्देश”
स्वर्णादि धातुओं के गुण२१५व्यापारी आदि से लाभ का ३२ वाँ भाग लेने का निर्देश”
धातुओं के मूल्य का प्रमाण”दूकानदार आदि से भूमि का कर लेने का निर्देश२२१
अधिक मूल्य गौ के लक्षण”राष्ट्र के दो प्रकारों का निर्देश”
बकरी आदि के मूल्य का प्रमाण२१६राज्य तथा राजा की सर्वश्रेष्ठता एवं देवतुल्यता का निर्देश”
गौ आदि के उत्तम मूल्यों का निर्देश”राजा को देश के पुण्य और पाप का भोक्ता होने का निर्देश२२२
हाथी आदि के उत्तम मूल्यों का निर्देश”नरक के लक्षण का निर्देश”
उत्तम अश्व आदि के लक्षण और मूल्य का निर्देश”राजा के धर्मिष्ठ बनने का निर्देश”
देश-कालानुसार सबों की मूल्य-कल्पना करने का निर्देश२१७सर्वधर्म-रक्षण से देश-रक्षा होने का निर्देश”
शुल्क के लक्षण”मुख्य जाति के ४ प्रकारों का तथा संकरता से जाति की अनन्तता का निर्देश२२३
वस्तुओं के शुल्क को एक बार ही ग्रहण करने का निर्देश”जरायुजादि चार प्राणियों की जाति का निर्देश”
किसान से भाग ( मालगुजारी ) लेने का प्रमाण२१८द्विजों तथा ब्राह्मणों के कर्मों का निर्देश”
उत्तम कृषिकृत्य के लक्षण”क्षत्रिय और वैश्य के कर्मों का निर्देश२२४
तडागादिकों से संपन्न भूमि से प्राप्त राजभाग का तारतम्य निर्देश”शूद्रादि के कर्मों का निर्देश”
रजतादियुक्त भूमि के लिये राज-भाग-नियम२१९
तृणकाष्ठादिविक्रेता आदि से २०वाँ भाग कर लेने का निर्देश”
बकरी आदि की वृद्धि से ८ वां भाग लेने का निर्देश”