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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 54 of 526

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Page 54

( ४ )

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
राजा से प्रदत्त भूषणादि धारण का निर्देश९३निश्चितान्यस्वामिक संचित धन के भेद१०६
स्वामी के प्रति भृत्य के कर्त्तव्य९४औपनिध्य-याचित-औत्तमर्णिक के लक्षण,,
आपस में भृत्यों के कर्त्तव्य९५अज्ञातस्वामिक के लक्षण१०७
राजा तथा भृत्य के परस्पर अच्छा व्यवहार करने का निर्देश,,स्वत्वविनिश्चित के भेद,,
डाकू के समान राजा के लक्षण,,साहजिक के लक्षण,,
प्रच्छन्न चोर के लक्षण,,अधिक के लक्षण,,
बालक भी राजपुत्र का तिरस्कार का निषेध९६संचित धन के लक्षण,,
लेख्यों के भेदों का निर्देश१०१संचित धन के भेद,,
लेख के दो भेदों का निर्देश१०२पार्थिवसंज्ञक आय के भेद१०८
जयपत्रक के लक्षण,,चलसंज्ञक आय के लक्षण,,
आज्ञापत्र के लक्षण,,विभागानुसार आय-व्यय के व्याप्य-व्यापक का निर्देश,,
प्रज्ञापनपत्र के लक्षण,,व्यय के भेदों एवं पुनरावर्त्तक के लक्षण,,
शासनपत्र के लक्षण१०३निधि, उपनिधि आदि व्यय के लक्षण१०९
प्रसादलिखित के लक्षण,,स्वत्वनिवर्त्तक के भेद,,
भोग-कर-उपायन-पुरुषावधिक और कालावधिक पत्रों के लक्षण .,,ऐहिक तथा पारलौकिक व्यय के भेद,,
विभागपत्र या भागलेख्य के लक्षण,,प्रतिदान, पारितोषिक और वेतन-व्यय के लक्षण,,
दानपत्र के लक्षण,,उपभोग्य के लक्षण,,
क्रयपत्र के लक्षण१०४भोग्य व्यय के लक्षण११०
सादिलेख्य के लक्षण,,पारलौकिक व्यय के चार भेद और उनके लक्षण,,
संवित्पत्र के लक्षण,,आय-व्यय-लेखक के कर्त्तव्य,,
ऋणलेख्य के लक्षण,,अवशिष्ट आय के विविध भेद१११
शुद्धिपत्र के लक्षण,,मान-उन्मान-परिमाण संख्या के लक्षण,,
सामयिक लेख्यपत्र-लक्षण,,लोकव्यवहारार्थ द्रव्य तथा धन के लक्षण,,
संमतिसंज्ञक पत्र के लक्षण,,मूल्य की परिभाषा,,
क्षेमपत्र के लक्षण१०५
वेदनार्थक पत्र के लक्षण,,
आय-व्यय लेख्य के लक्षण,,
राजाओं के आय-व्ययादिक के लक्षण,,
आय के भेद१०६
संचित आय के भेद,,