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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 496 of 526

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Page 496

४१० | शुक्रनीतिः

सहस्रग्रामपो नित्यं नराश्वद्वयश्वयानगः ॥ ८३ ॥
आयुतिको विंशतिभिः सेवकैर्हस्तिना व्रजेत् ।
१००० ग्रामों का या १०००० सैनिकों का अधिपति नित्य २० सैनिकों के साथ पालकी, घोड़ा या दो घोड़े जुते हुये रथ या हाथी पर सवार होकर विचरण करें ।

अयुतग्रामपः सर्वयानैश्च चतुरश्वगः ॥ ८४ ॥
पञ्चायुतो सेनपोऽपि सञ्चरेद् बहुसेवकः ।
१०००० ग्रामों का और ५०००० हजार सैनिकों का अधिपति ये दोनों बहुत से भृत्यों (सैनिकों) से युक्त होकर सभी प्रकार की सवारियों से या चार घोड़े जुते हुये रथ पर सवार होकर विचरण करें ।

यथाधिकाधिपत्यं तु धीट्याधिक्यं प्रकल्पयेत् ॥ ८५ ॥
कल्पयेच्च यथाधिक्यं धनिकेषु गुणिष्वपि ।
जैसी अधिक संख्या वाले ग्रामों या सैनिकों के ऊपर आधिपत्य हो उसी के अनुसार संमान की अधिकता की कल्पना करनी चाहिये । इसी प्रकार से धनिकों तथा गुणियों में भी उनकी जैसी धन तथा गुण की अधिकता हो उसी के अनुसार उनके सम्मान की कल्पना करनी चाहिये ।

श्रेष्ठो न मानहीनः स्यान्न्यूनो मानाधिकोऽपि न ॥ ८६ ॥
राष्ट्रे नित्यं प्रकुर्वीत श्रेयोऽर्थी नृपतिस्तथा ।
श्रेष्ठ तथा हीन पुरुष के संमान में न्यूनाधिक्य का निषेध—कल्याण के चाहने वाले राजा को अपने राज्य में इस तरह की व्यवस्था करनी चाहिये कि जिसमें श्रेष्ठ पुरुष—उचित सम्मान से हीन, न्यून पुरुष—उचित सम्मान से अधिक सम्मान न प्राप्त करे, अर्थात् सबका यथोचित सम्मान हो, उसमें न्यूनाधिक्य न होने पावे ।

हीनमध्योत्तमानां तु ग्रामभूमिं प्रकल्पयेत् ॥ ८७ ॥
कुटुम्बिनां गृहाऽर्थं तु पत्तनेऽपि नृपः सदा ।
उत्तमादि गृह-भूमि के प्रमाणों का निर्देश—राजा ग्राम में हीन, मध्यम तथा उत्तम लोगों के लिये तथा कुटुम्बियों के लिये नगर में घर बनाने के योग्य सदा उचित भूमि की व्यवस्था करे ।

द्वात्रिंशत्प्रमितैर्हस्तैर्दीर्घाऽर्द्धा विस्तृताधमे ॥ ८८ ॥
उत्तमा द्विगुणा मध्या सार्धमाना यथार्हतः ।
कुटुम्बसंस्थितिसमा न न्यूना वाऽधिकाऽपि न ॥ ८९ ॥
३२ हाथ लम्बी तथा १६ हाथ चौड़ी अधमा, ६४ हाथ लम्बी तथा ३२ हाथ चौड़ी उत्तमा और ४८ हाथ लम्बी तथा २४ हाथ चौड़ी मध्या-