शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
by महर्षि शुक्राचार्य
Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)
Page 466 of 526
Read in context| ३८० | शुक्रनीतिः |
|---|
मध्यम, शस्त्रों से होने वाले को कनिष्ठ और बाहु से होनेवाले युद्ध को अधम कहते हैं।
मन्त्रेरितमहाशक्तिबाणाद्यैः शत्रुनाशनम् ॥ ३३५ ॥
मान्त्रिकास्त्रेण तद्युद्धं सर्वयुद्धोत्तमं स्मृतम् ।
**सर्वोत्तम युद्ध के लक्षण—**जिस में मन्त्र से अभिमन्त्रित करके छोड़े हुये महाशक्तिशाली बाणादि द्वारा शत्रु का नाश किया जाता है, ऐसे मान्त्रिकास्त्र से होने वाले युद्ध को सब युद्धों में उत्तम कहा जाता है।
नालाग्निक्षूर्णसंयोगाल्लक्ष्ये गोलनिपातनम् ॥ ३३६ ॥
नालिकास्त्रेण तद्युद्धं महाह्रासकरं रिपोः ।
**नालिकास्त्र युद्ध का लक्षण—**जिसमें तोप या बन्दूक की नाल में बारूद भर कर आग लगाने के द्वारा लक्ष्यस्थान पर गोली या गोला छोड़ा जाता है, ऐसे नालिकास्त्र द्वारा होने वाले युद्ध को शत्रुओं के लिये महाह्रास (हानि) करने वाला माना जाता है।
कुन्तादिशस्त्रसङ्घातै रिपूणां नाशनं च यत् ॥ ३३७ ॥
शस्त्रयुद्धं तु तज्ज्ञेयं नालास्त्राऽभावतः सदा ।
**शस्त्रयुद्ध का लक्षण—**जिसमें सदा नालास्त्र का अभाव होने से केवल भाला आदि शस्त्र-समूहों के द्वारा शत्रुओं का नाश किया जाता है उसे शस्त्र-युद्ध समझना चाहिये।
कर्षणैः सन्धिमर्म्णां प्रतिलोमानुलोमतः ॥ ३३८ ॥
बन्धनैर्घातनं शत्रोर्युक्त्या तद् बाहुयुद्धकम् ।
**बाहुयुद्ध का लक्षण—**कौशल के साथ शत्रु के सन्धिस्थान तथा मर्म-स्थानों को पीड़ित करने से तथा उलटा तथा सीधे ढङ्ग से बाहुओं द्वारा बांधने से जहां पर आघात पहुँचाया जाता है, उसे 'बाहुयुद्ध' कहते हैं।
वामपाणिकचोत्पीडा भूमौ निष्पेषणं बलात् ॥ ३३९ ॥
मूर्ध्नि पादप्रहरणं जानुनोदरपीडनम् ।
मालूराकारया मुष्ट्या कपोले दृढताडनम् ॥ ३४० ॥
कफोणिपातोऽप्यसकृत्सर्वतस्तलताडनम् ।
जालेन युद्धे भ्रमणं नियुद्धं स्मृतमष्टधा ॥ ३४१ ॥
**बाहुयुद्ध के ८ प्रकारों का निर्देश—**बाहुयुद्ध आठ प्रकार का होता है। जैसे १-बायें हाथ से बालों को पकड़ना, २-जबरदस्ती भूमि में पटक कर रगड़ना, ३-सिर में पैर से प्रहार करना, ४-घुटने से पेट को दबाना, ५-बेल के समान दृढ मुष्ठी से कपोल में कठिन प्रहार करना, ६-बारंबार केहुनी को बलपूर्वक भूमि पर गिराना, ७-सभी प्रकार से चपेटा द्वारा प्रहार करना,