Skip to content
SarvaKosh
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 311 of 526

Read in context
Page 311

चतुर्थाऽध्याये विद्याकलानिरूपणप्रकरणम् २२५

गुरु का लक्षण—जिस द्विज ने संपूर्ण विद्याओं तथा कलाओं का अध्ययन किया है वही सबों का गुरु (श्रेष्ठ या उपदेष्टा) होने योग्य होता है, बिना इसके केवल जातिमात्र से वह गुरु नहीं हो सकता है।

विद्या ह्यनन्ताश्च कलाः संख्यातुं नैव शक्यते ।
विद्यामुख्याश्च द्वात्रिंशच्चतुःषष्टिकलाः स्मृताः ॥ २३ ॥

मुख्य विद्या ३२ और कला ६४ होने का निर्देश—यद्यपि विद्यायें तथा कलायें अनन्त हैं अतः उनकी गणना नहीं की जा सकती है, तथापि उनमें से मुख्य रूप से ३२ विद्यायें तथा ६४ कलायें मानी गई हैं।

यद्यत्स्याद्वाचिकं सम्यक्कर्मविद्याभिसंज्ञकम् ।
शक्तो मूकोऽपि यत्कर्तुं कलासंज्ञं तु तत्स्मृतम् ॥ २४ ॥

विद्या और कला के लक्षण—जो २ कर्म वाणी द्वारा भलीभांति संपन्न किया जा सकता है वह 'विद्या' नाम से प्रसिद्ध है और जिसे गूंगा भी हाथ से कर सकता है उसे 'कला' कहते हैं ।

उक्तं संक्षेपतो लक्ष्म विशिष्टं पृथगुच्यते ।
विद्यानां च कलानां च नामानि तु पृथक् पृथक् ॥ २५ ॥

इस प्रकार से संक्षेप में लक्षण कहा गया, अब विशेष रूप से पृथक् २ लक्षण कहते हैं । उनमें विद्याओं तथा कलाओं के नाम पृथक् २ ये सब हैं।

ऋग्यजुः साम चाथर्वं वेदा आयुर्धनुः क्रमात् ।
गान्धर्व्वंश्चैव तन्त्राणि उपवेदाः प्रकीर्तिताः ॥ २६ ॥

विद्याओं में वेद तथा उपवेद के नामों का निर्देश—जैसे विद्यायें १. ऋग्वेद, २. यजुर्वेद, ३. सामवेद, ४. अथर्ववेद ये ४ वेद हैं और क्रम से ५. आयुर्वेद, ६. धनुर्वेद, ७. गान्धर्ववेद, ८. तन्त्र ये ४ उपवेद हैं ।

शिक्षा व्याकरणं कल्पो निरुक्तं ज्यौतिषं तथा ।
छन्दः षडङ्गानीमानि वेदानां कीर्तितानि हि ॥ २७ ॥

वेदों के ६ अंगों का निर्देश—९. शिक्षा, १०. व्याकरण, ११. कल्प, १२. निरुक्त, १३. ज्योतिष, १४. छन्द ये वेदों के ६ अङ्ग माने गये हैं ।

मीमांसातर्कसांख्यानि वेदान्तो योग एव च ।
इतिहासाः पुराणानि स्मृतयो नास्तिकं मतम् ॥ २८ ॥
अर्थशास्त्रं कामशास्त्रं तथा शिल्पंमलङ्कृतिः ।
काव्यानि देशभाषाऽव-सरोक्त्योर्ब्वनं मतम् ॥ २९ ॥
देशादिधर्मा द्वात्रिंशदेता विद्याभिसंज्ञिताः ।

मीमांसादि विद्याओं के नामों का निर्देश—१५. मीमांसा, १६. तर्क (न्याय वैशेषिक), १७. सांख्य, १८. वेदान्त, १९. योग, २०. इतिहास,