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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 293 of 526

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Page 293

चतुर्थोऽध्याये कोशनिरूपणप्रकरणम् २०७

स्वकार्ये शिथिलो यः स्यात् किमन्ये न भवन्ति हि ।
जागरूकः स्वकार्ये यस्तत्सहायाश्च तत्समाः ॥ ३५ ॥

स्वकार्य में सदा सजग रहने का निर्देश— जो अपने ही कार्य में स्वयं शिथिल (पूर्ण रूप से नहीं तत्पर) रहता है तो उसके सहायक अन्य लोग उस कार्य में क्यों नहीं शिथिल होंगे ? अर्थात् अवश्य होंगे। क्योंकि अपने कार्य में जो जागरूक (दृढ़ तत्पर) रहता है तो उसके सहायक भी उसी के समान उस कार्य में जागरूक रहते हैं।

यो जानात्यर्जितुं सम्यगर्जितं न हि रक्षितुम् ।
नातः परतरो मूर्खो वृथा तस्यार्जनश्रमः ॥ ३६ ॥

संचय की रक्षा न कर सकने पर मूर्खता होने का निर्देश— जो उपार्जन करना तो अच्छी तरह से जानता है किन्तु उसकी अच्छी तरह रक्षा करना नहीं जानता है। उससे बढ़कर मूर्ख कोई दूसरा नहीं है क्योंकि उसका उपार्जन करने का श्रम वृथा हो जाता है।

एकस्मिन्नधिकारे तु यो द्वावधिकरोति सः ।
मूर्खो जीवद्-द्विभार्यश्च ह्यतिविश्रम्भवांस्तथा ॥ ३७ ॥
महाधनाशो रचलसः स्त्रीभिनिर्जित एव हि ।
तथा यः साक्षितां पृच्छेच्चौरजाराततायिषु ॥ ३८ ॥

मूर्ख के लक्षण— जो एक अधिकार (कार्यभार) रहने हुये भी दो अधिकारों पर अधिकार रखता है, जो स्त्री के जीते रहते दूसरी शादी करता है, जो अत्यन्त दूसरे पर विश्वास रखता है, जो महान् धन की आशा रखते हुये आलसी रहता है, जो स्त्री के अधीन रहता है, तथा जो चोर, परस्त्रीगामी, आततायी के विषय में साक्षी (गवाही) मानता है अथवा उनसे गवाह मांगता है वह मूर्ख है।

संरक्षयेत् कृपणवत् काले दद्याद्विरक्तवत् ।
मूर्खत्वमन्यथा याति स्वधनव्ययतोऽपि च ॥ ३९ ॥

कृपण की भांति धन की रक्षा करे और समय आने पर विरक्त की भांति उसे दे देवे, अन्यथा (इससे विपरीत होने पर) अपने धन के व्यय करने पर मूर्खता को प्राप्त होता है।

वस्तुयाथात्म्यविज्ञाने स्वयमेव यतेत् सदा ।
परीक्षकैः स्वयं राजा रत्नादीन् वीक्ष्य रक्षयेत् ॥ ४० ॥

राजा को परीक्षकों से स्वयं रत्न की परीक्षा कराने का निर्देश— प्रत्येक वस्तुओं के यथार्थ स्वरूप जानने के लिये स्वयं सदा यत्न करना चाहिये।