शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
by महर्षि शुक्राचार्य
Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)
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Read in contextचतुर्थाध्याये कोशानिरूपणप्रकरणम् २०५
वह 'मध्यम' एवं जो १० वर्ष तक परिवार की रक्षा करने योग्य होता है वह 'उत्तम' संज्ञक धन होता है ।
क्रमादर्धं रक्षेद्येद्वा स्वापत्तौ नृप एषु वै ।
अपने ऊपर आपत्ति आने पर राजा नीचादि क्रम से अपने धन को इन सबों के पास रक्षार्थ रख दे ।
मूलैरर्थ्यं वहन्त्यन्यैर्धनं बुद्ध्या वणिजः क्वचित् ॥ २३ ॥
विक्रीणन्ति महार्घे तु हीनार्घे सञ्चयन्ति हि ।
व्यवसायी ( व्यापारी ) लोग मुख्यभूत मूल धन से व्यापार करते हैं अर्थात् वस्तुओं का खरीदना-बेचना रूप व्यापार करते हैं केवल सूद पर अपना सारा मूलधन नहीं लगाते हैं और वे महंगी होने पर खरीदी वस्तु को बेचते हैं तथा सस्ती होने पर वस्तु खरीद कर संचय करते हैं ।
व्यवहारे धृतं वैश्यैस्तद्धनेन विना सदा ॥ २४ ॥
अन्यथा स्वप्रजातापो नृपं दहति सान्वयम् ।
प्रजा के सन्ताप से सवंश राजा के नाश का निर्देश— और व्यवहार ( क्रय-विक्रय ) के लिये रखी हुई वस्तुओं को धन ( मूल्य ) बिना दिये वैश्यों से सदा राजा को जबर्दस्ती नहीं लेना चाहिये । यदि राजा बिना मूल्य दिये ले लेता है तो उससे उत्पन्न हुई प्रजा की सन्तापरूपी अग्नि वंश के सहित उस राजा को जला देती है ।
धान्यानां संग्रहः कार्यो वत्सरत्रयपूर्तिदः ॥ २५ ॥
तत्तत्काले स्वराष्ट्रार्थं नृपेणात्महिताय च ।
चिरस्थायी समृद्धानामधिको वाऽपि चेष्यते ॥ २६ ॥
धान्य-संग्रह करने के प्रमाण का निर्देश— राजा को अपने कल्याण के लिये और राज्य की रक्षा के लिये समय-समय पर तीन वर्ष तक खाने के लिये पर्याप्त धान्यों का संग्रह कर लेना चाहिये । और ऐश्वर्यशाली लोगों के लिये उससे भी अधिक कालतक कार्य चलने लायक अधिक धान्य का संग्रह करना उचित होता है ।
सुपुष्टं कान्तिमज्जातिश्रेष्ठं शुष्कं नवीनकम् ।
ससुगन्धवर्णरसं धान्यं संवीक्ष्य रक्षयेत् ॥ २७ ॥
सुसमृद्धं चिरस्थायी महार्घमपि नान्यथा ।
संग्रह योग्य धान्य आदि की परीक्षा का निर्देश— अच्छी तरह से पका हुआ, उज्ज्वल, अच्छी जाति का, सूखा हुआ, नवीन, सुगन्ध, वर्ण तथा रस ( स्वाद ) से युक्त, सुन्दर एवं बहुत कालतक ठहरनेवाला, ऐसे धान्य को अच्छी तरह से देखकर यदि अधिक मूल्य का भी हो तो लेकर रखना उचित है । यदि इससे अन्यथा हो तो उस धान्य का संग्रह नहीं करना चाहिये ।