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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 216 of 526

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Page 216
१३०शुक्रनीतिः

संभाल सकता है या नहीं ऐसे सन्देहयुक्त वृक्ष पर एवं छुए घोड़े आदि वाहन पर नहीं चढ़ना चाहिये।

नासिकां न विकृष्णीयान्नाकस्माद्विलिखेद् भुबम् ॥ २७ ॥
न संहताभ्यां पाणिभ्यां कण्डूयेदात्मनः शिरः ।

नाक को अंगुली से नहीं कुरेदना चाहिये अर्थात् उससे नासामल नहीं निकालना चाहिये। अकस्मात् पृथ्वी पर रेखा आदि नहीं खींचना चाहिये अथवा खोदना नहीं चाहिये। और अपने सिर को दोनों हाथों से एक साथ नहीं खुजलाना चाहिये।

नाङ्गैश्चेष्टेत विगुणं नासीतोत्कटुकश्चिरम् ॥ २८
देहवाक्चेतसां चेष्टाः प्राक् श्रमाद् विनिवर्त्तयेत् ।

अङ्गों को टेढ़ा-मेढ़ा करके चेष्टा नहीं करे, कठिन आसन पर देर तक एक आसन से नहीं बैठना चाहिये। देह, वाणी तथा मन के व्यापार को श्रम होने के पहले ही बन्द कर देना चाहिये अर्थात् थकावट जब तक न हो तभी तक कार्य करना चाहिये।

नोर्ध्वजानुश्चिरं तिष्ठेन्नक्तं सेवेत न द्रुमम् ॥ २९ ॥
तथा चत्वरचैत्यं न चतुष्पथसुरालयान्।
शून्याटवीशून्यगृहश्मशानानि दिवापि न ॥ ३० ॥

**देरतक उकरू बैठने, रात्रि में वृक्ष पर चढ़ने आदि का निषेध—**ऊपर जानु करके (उकरू) देर तक नहीं बैठना चाहिये। रात्रि में पेड़ के तले नहीं रहना चाहिये एवं किसी देवता के चबूतरे या वृक्ष, चौराहा तथा देवमन्दिर में रात्रिनिवास नहीं करना चाहिये और शून्य जङ्गल या गृह और श्मशान में दिन में भी नहीं रहना चाहिये, रात्रि में तो नहीं ही रहना चाहिये।

सर्वथैक्षेत नादित्यं न भारं शिरसा वहेत् ।
नेक्षेत सततं सूक्ष्मं दीप्तामेध्याप्रियाणि च ॥ ३१ ॥

**सूर्य को निरन्तर देखने का निषेध—**किसी भी प्रकार से देर तक सूर्य की तरफ नहीं देखना चाहिये और सिर से बोझा नहीं उठाना चाहिये। निरन्तर सूक्ष्म, अत्यन्त चमक से युक्त, अपवित्र या अप्रिय वस्तुओं को देर तक नहीं देखना चाहिये।

सन्ध्यास्वभ्यवहारस्त्रीस्वप्नाध्ययनचिन्तनम् ।
मद्यविक्रयसन्धानदानादानानि नाचरेत् ॥ ३२ ॥

**सन्ध्या समय में भोजनादि का निषेध—**सन्ध्या समय में भोजन, स्त्री प्रसङ्ग, सोना, पढ़ना या किसी विषय की चिन्ता करना, मद्य का बेचना, चुआना, देना या लेना ये सब कार्य नहीं करना चाहिये।