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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 169 of 526

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Page 169

द्वितीयोऽध्यायः ८३

द्वारपाल के लक्षण—जो शस्त्र तथा अस्त्र चढ़ाने में निपुण, दृढ़ अङ्गों वाला, आलस्यरहित, एवं नम्रता के साथ योग्यतानुसार लोगों को पुकार कर राजा के पास ले जानेवाला हो उसे 'प्रतिहारक' (द्वारपाल) पद पर नियुक्त करना चाहिये।

यथा विक्रयिणां मूलधननाशो भवेन्नहि ।
तथा शुल्कं तु हरति शौल्किकः स उदाहृतः ॥ १७६ ॥

चुङ्गी लेनेवाले के लक्षण—बेचनेवालों का मूल धन में जिससे कमी न आये ऐसे शुल्क (चुङ्गी) को जो व्यापारियों से वसूल करनेवाला हो उसे 'शौल्किक' पद पर नियुक्त करे।

जपोपवास-नियम-कर्मध्यानरतः सदा ।
दान्तः क्षमो निःस्पृहश्च तपोनिष्ठः स उच्यते ॥ १७७ ॥

तपोनिष्ठ के लक्षण—जो सदा जप, उपवास, नियम (व्रतपालन), शास्त्रोक्त कर्म तथा ध्यान में रत रहनेवाला, इन्द्रियों का दमन करनेवाला, क्षमाशील, निःस्पृह रहनेवाला हो उसे 'तपोनिष्ठ' कहते हैं।

याचकेभ्यो ददात्यर्थं भार्यापुत्रादिकं त्वपि ।
न संगृह्णाति यत्किञ्चिद् दानशीलः स उच्यते ॥ १७८ ॥

दानशील के लक्षण—जो याचकों को मांगने पर अपना धन, स्त्री तथा पुत्रादि को भी दे डालता है और उस समय अपने पास कुछ नहीं बचाकर रख लेता है, वह 'दानशील' कहलाता है।

पठनं पाठनं तुक क्षमास्त्वभ्यासशालिनः ।
श्रुतिस्मृतिपुराणानां श्रुतज्ञास्ते प्रकीर्तिताः ॥ १७९ ॥

श्रुतज्ञ के लक्षण—जो श्रुति (वेद), स्मृति तथा पुराणों का अध्ययन (पढ़ना) तथा अध्यापन (पढ़ाना) करने में समर्थ तथा उन सबों का नित्य अभ्यास करनेवाले हैं उन्हें (श्रुतज्ञ) कहते हैं।

साहित्यशास्त्रनिपुणः संगीतज्ञश्च सुस्वरः ।
सर्गादिपञ्चकज्ञाता स वै पौराणिकः स्मृतः ॥ १८० ॥

पौराणिक के लक्षण—जो साहित्य शास्त्र में निपुण, सङ्गीत का जाननेवाला, सुन्दर स्वरवाला एवं सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वन्तर, वंशानुचरित इन पाँच विषयों का जाननेवाला हो वह 'पौराणिक' कहलाता है।

मीमांसातर्कवेदान्तशब्दशासनतत्परः ।
ऊङ्खान्बोधिधतुं शक्तस्तत्त्वतः शास्त्रविच्च सः ॥ १८१ ॥

शास्त्रविद् के लक्षण—जो मीमांसा, तर्क (न्याय), वेदान्त, शब्दशासन (व्याकरणादि शब्द शास्त्र) का जाननेवाला, उक्त विषयों में तर्क करने तथा