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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

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DevanagariHindipublished526 pages

Page 164 of 526

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Page 164

७८ | शुक्रनीतिः

शतानीकादिकों के लक्षण—सायं-प्रातः सैनिकों को व्यूह-रचना का अभ्यास (कवायत या परेड) कराना और भली भांति युद्ध करने के लिये रणसज्जा (युद्ध योग्य सामग्री-वेषभूषा से सुसज्जित करना) का ज्ञान रखना, यह शतानीक का कर्त्तव्य है।

तथाविधोऽनुशतिकः शतानीकस्य साधकः ॥ १४४ ॥
जानाति युद्धसम्भारं कार्ययोग्यं च सैनिकम् ।

और जो इन्हीं गुणों से युक्त, शतानीक की सहायता करने वाला युद्धोपयोगी सामग्रियों का तथा कार्य योग्य सैनिकों का जानने वाला होता है वह 'अनुशतिक' कहलाता है। अर्थात् उक्त कार्यों का भार उसके ऊपर रहता है।

निदेशयति कार्याणि सेनानीर्यामिकांश्च सः ॥ १४५ ॥
परिवृत्तिं यामिकानां करोति स च पत्तिपः ।

जो प्रहरी (पहरा देने वाले) लोगों के लिये कार्य बताता है अर्थात् जिसके निर्देशानुसार सिपाही कार्य करते हैं वह (सेनानी) कहलाता है। और प्रहरी गणों का जो पहरा बदलता है वह 'पत्तिप' या 'पत्तिपाल' कहलाता है।

सावधानं यामिकानां विजानीयाच्च गुल्मपः ॥ १४६ ॥

जो प्रहरियों को अपने २ कामों में सतर्कता का निरीक्षण करता है वह 'गुल्मप' या 'गौल्मिक' कहलाता है।

सैनिकाः कति सन्त्येतैः कति प्राप्तं तु वेतनम् ।
प्राचीनाः के कुत्र गताश्चैतान्वेत्ति स लेखकः ॥ १४७ ॥
गजाश्वानां विंशतेश्चाधिपो नायकसंज्ञकः ।

जो सेना में कितने सैनिक हैं? और उन्होंने कितना वेतन पाया है? पुराने असमर्थ सैनिक कितने हैं? और कौन कहां २ गये हैं, इन सबों को जान कर लिखता है, वह 'लेखक' कहलाता है। और २० हाथियों एवं २० घोडों का अध्यक्ष 'नायक' कहलाता है।

उक्तसंज्ञान्स्वस्वचिह्नैर्लाञ्छितांश्च नियोजयेत् ॥ १४८ ॥

उपर्युक्त अधिकारियों को अपने २ चिह्नों से युक्त रहने का निर्देश—ऊपर जिनके नामों का निर्देश किया गया है उन पत्तिपाल आदियों को उनके जो २ चिह्न हों उन से युक्त करके कार्य करने का आदेश देना चाहिये।

अजाविगोमहिष्येणमृगाणामधिपाश्च ये ।
तद्वृद्धिपुष्टिकुशलास्तद्घासल्यानिपीडिताः ॥ १४९ ॥
तथाविधा गजोष्ट्रादेर्योध्यास्तत्सेवका अपि ।

बकरा, मेढ़ा, गौ, भैंस, एण (मृग विशेष), मृग, इनके जो अध्यक्ष हों