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सर्वकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ

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पृष्ठ 1922

'पर्वतोंके शिखर, वृक्ष और शिलाएँ एकत्र कर लो तथा तुम और सब वानर अस्त्र-शस्त्र एवं पत्थर लिये तैयार रहो'॥ ३६ ॥

श्रीरघुनाथजीकी यह आज्ञा पाकर वानरसेनापति कपिश्रेष्ठ नीलने वानरसैनिकोंको यथोचित कार्यके लिये आदेश दिया॥ ३७ ॥

तदनन्तर गवाक्ष, शरभ, हनुमान् और अङ्गद आदि पर्वताकार वानर पर्वतशिखर लिये लङ्काके द्वारपर डट गये॥ ३८ ॥

विजयोल्लाससे सुशोभित होनेवाले वीर वानर श्रीरामचन्द्रजीकी पूर्वोक्त आज्ञा सुनकर वृक्षोंद्वारा शत्रुसेनाको पीड़ित करने लगे॥ ३९ ॥

तदनन्तर हाथोंमें शैल-शिखर और वृक्ष लिये वानरोंकी वह भयंकर सेना पर्वतके समीप घिरी हुई मेघोंकी बड़ी भारी उग्र घटाके समान सुशोभित होने लगी॥ ४० ॥

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें इकसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६१ ॥