श्रीमद्भागवत महापुराण
Shrimad Bhagavata Mahapurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४-अपशकुन देखकर महाराज युधिष्ठिरका शंका करना और अर्जुनका द्वारकासे लौटना
१५-कृष्णविरहव्यथित पाण्डवोंका परीक्षित्को राज्य देकर स्वर्ग सिधारना
१६-परीक्षित्की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वीका संवाद
१७-महाराज परीक्षित्द्वारा कलियुगका दमन
१८-राजा परीक्षित्को शृंगी ऋषिका शाप
१९-परीक्षित्का अनशनव्रत और शुकदेवजीका आगमन
द्वितीय स्कन्ध
१-ध्यान-विधि और भगवान्के विराट्स्वरूपका वर्णन
२-भगवान्के स्थूल और सूक्ष्मरूपोंकी धारणा तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्तिका वर्णन
३-कामनाओंके अनुसार विभिन्न देवताओंकी उपासना तथा भगवद्भक्तिके प्राधान्यका
निरूपण
४-राजाका सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजीका कथारम्भ
५-सृष्टि-वर्णन
६-विराट्स्वरूपकी विभूतियोंका वर्णन
७-भगवान्के लीलावतारोंकी कथा
८-राजा परीक्षित्के विविध प्रश्न
९-ब्रह्माजीका भगवद्धामदर्शन और भगवान्के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवतका उपदेश
१०-भागवतके दस लक्षण
तृतीय स्कन्ध
१-उद्धव और विदुरकी भेंट
२-उद्धवजीद्वारा भगवान्की बाललीलाओंका वर्णन
३-भगवान्के अन्य लीलाचरित्रोंका वर्णन
४-उद्धवजीसे विदा होकर विदुरजीका मैत्रेय ऋषिके पास जाना
५-विदुरजीका प्रश्न और मैत्रेयजीका सृष्टिक्रम वर्णन
६-विराट् शरीरकी उत्पत्ति
७-विदुरजीके प्रश्न
८-ब्रह्माजीकी उत्पत्ति
९-ब्रह्माजीद्वारा भगवान्की स्तुति
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