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शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

Shatapatha Brahmana Part 1 - Shukla Yajurveda

by महर्षि याज्ञवल्क्य / सायणभाष्य

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान · 1950 (origin)

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DevanagariSanskritpublished699 pages

Page 505 of 699

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Page 505

कां० ३, अ० ८. ब्रा० ३, क० १-१० शतपथब्राह्मण / ४८७
पीछे से पुरोडाश इसलिए बनाते हैं, कि जो धान और जौ हैं वे वस्तुतः सब पशुओं का मेध है।
इसी मेध से वह इस पशु को चंगा करता है या पूरा करता है। इसीलिए वह पीछे से पुरोडाश
बनाता है ॥१॥
वपा को काम में लाकर पुरोडाश क्यों बनाते हैं ? इसलिए कि पशु के बीच से ही तो वपा
को निकालते हैं। मध्य में ही इसको मेध द्वारा चंगा करते हैं या पूरा करते हैं। इसीलिए वपा को
काम में लाकर तब पुरोडाश को काम में लाते हैं। इनका सम्बन्ध हर जगह एक-सा ही है। जहाँ
कहीं पशु होता है वहीं पुरोडाश भी होता है ॥२॥
अब पशु (पशुता) को काटता है। और कहता है, 'तीन बार घूमो और तीन बार घूमे
हुए के हृदय को ऊपर उठाओ।' क्योंकि यज्ञ त्रिवृत् (तीन वाला) होता है ॥३॥
अब शमिता (काटनेवाला—कसाई) को आदेश देता है 'यदि कोई पूछे कि हे शमिता,
हवि पक गया ?' तो कहना 'पक गया'; यह न कहना कि 'श्रीमान् जी पक गया' या 'पक तो
गया' ॥४॥
अब जुहू से पृषदाज्य को लेकर अध्वर्यु आगे बढ़कर पूछता है, 'हे शमिता, हवि पका ?'
वह कहता है 'पका।' अध्वर्यु चुपके से कहता है, 'यह देवताओं का है' ॥५॥
यह इसलिए पूछता है कि देवताओं का हवि पका हुआ होता है, बे-पका नहीं। शमिता
इसको जानता है कि पका है या नहीं पका है ॥६॥
वह पूछता इसलिए है कि वह समझता है कि मैं पके हुए को काम में लाऊँ। और यदि बे-
पका हो तो देवों का हवि पका होता है और यजमान की अपेक्षा से पका ही होता है। अध्वर्यु
निर्दोष हो जाता है। दोष शमिता का रहता है। वह तीन बार पूछता है क्योंकि यज्ञ तिहरा होता
है। 'यह देवों का है' ऐसा इसलिए कहता है कि जो पका है वह देवों का है। इसलिए वह कहता
है कि यह देवों का है ॥७॥
पहले वह हृदय का अभिघार करता है, क्योंकि 'हृदय' मन और आत्मा है, पृषदाज्य
प्राण है। इस प्रकार वह आत्मा और मन में प्राण धारण कराता है। इस प्रकार देवों का हवि जीव
होता है, अमृतों का अमृत ॥८॥
वह इस मन्त्र से अभिघार करता है— “सं ते मनो मनसा सं प्राणः प्राणेन गच्छताम्”
(यजु०६।१८)— “तेरा मन मन से मिले, प्राण प्राण से।” वह 'स्वाहा' नहीं कहता क्योंकि हवि
तो है नहीं। वह पशु को हटा देता है ॥६॥
वे इसको चात्वाल के पीछे से यूप और अग्नि के बीच से ले जाते हैं। जब यह पका हुआ
है तो फिर उसे मध्य से क्यों नहीं ले जाते जैसा कि अन्य हवियों को ले जाते हैं ? इसका कारण
यह है कि कहीं मध्य में इसका संसर्ग अङ्गों से विकृत (कटा-कटाया) और घायल से न होजाय।
बाहर से इसलिए नहीं ले जाते कि कहीं यज्ञ से बहिष्कृत न हो जाय। इसलिए वे यूप और अग्नि
के बीच से ले जाते हैं। दक्षिण की ओर रखकर प्रतिप्रस्थाता टुकड़े-टुकड़े करता है। पलाश की
शाखाएँ ऊपरी बर्हि का काम देती हैं। उन्हीं पर काटता है। पलाश शाखा में ऊपरी बर्हि का काम
क्यों देती हैं ? (इसका उत्तर आगे पढ़िये) ॥१०॥