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शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद - प्रथम भाग)

Shatapatha Brahmana Part 1 - Shukla Yajurveda

by महर्षि याज्ञवल्क्य / सायणभाष्य

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान · 1950 (origin)

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DevanagariSanskritpublished699 pages

Page 173 of 699

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Page 173

कां० १, अ० ८, ब्रा० १, कं० १३-२३ शतपथब्राह्मण / १५५
(चमसे) के सामने रखता है, और उसे होता को देकर दक्षिण की ओर आता है ॥१३॥
वह होता के इस जगह (पहली अँगुली के बीच में) घी लगाता है । होता घी अपने होठों
से लगाता है, यह मन्त्र पढ़कर— “मनस्पतिना ते हुतस्याश्नामीषे प्राणाय”—“मन के पति द्वारा
आहुति दिये गये तुझको वह इस (बल) और प्राण के लिए खाता हूँ” ॥१४॥
अब वह होता के इस जगह (अँगुली पर) घी लगाता है। होता घी अपने होठों से लगाता
है, यह मन्त्र पढ़कर “वाचस्पतिना ते हुतस्याऽश्नाम्यूर्जैऽउदानाय”—“वाणी के पति द्वारा आहुति
दिये गये तुझको तेज और उदान के लिए खाता हूँ” ॥१५॥
इस पर मनु डरा कि यह जो पाक-यज्ञिया इडा है, यह मेरे यज्ञ का सबसे कमजोर भाग
है। कहीं ऐसा न हो कि राक्षस लोग मेरे यज्ञ को इस स्थान पर विध्वंस कर दें, इसलिए (उस इडा
को) राक्षसों के आने से पहले ही उसने (होठों से लगाकर) सुरक्षित कर दिया। इसी प्रकार यह
होता भी राक्षसों के आने से पहले ही सुरक्षित कर देता है। यद्यपि वह इसे खाता नहीं कि बिना
आहुति दिये कैसे खा लूँ, परन्तु वह होठों से लगाकर उसे सुरक्षित कर देता है ॥१६॥
अब वह होता के हाथ में इडा के टुकड़े-टुकड़े करता है। इस प्रकार टुकड़े-टुकड़े की गई
इडा को वह प्रत्यक्ष रूप से होता के हवाले कर देता है। जो उसके हवाले हो गई उस इडा से वह
यजमान के लिए आशीर्वाद चाहता है। इसलिए होता के हाथ में रखता है ॥१७॥
अब (इडा को) चुपके-चुपके बुलाता है। उस समय सचमुच मनु यह सोचकर डरा कि
यह पाक-यज्ञिया इडा मेरे यज्ञ का सबसे कमजोर भाग है; कहीं राक्षस इसको हानि न पहुँचावे ।
इसीलिए उसने चुपके-चुपके कहा, 'राक्षस (के आने) से पूर्व, राक्षस (के आने) से पूर्व।' इसी
प्रकार यह होता भी चुपके-चुपके कहता है, 'राक्षस (के आने) से पूर्व' ॥१८॥
वह इस प्रकार (धीरे से) कहता है, 'पृथिवी के साथ रथन्तर बुलाया गया। पृथिवी के
साथ रथन्तर मुझे बुलाये। अन्तरिक्ष के साथ वामदेव्य बुलाया गया । अन्तरिक्ष के साथ वामदेव्य
मुझे बुलावे। द्यौ के साथ बृहत् बुलाया गया। द्यौ के साथ बृहत् मुझे बुलावे।' वह इस प्रकार
बोलकर तीनों लोकों और तीनों सामों को बुलाता है (रथन्तर, वामदेव्य और बृहत् तीन साम
हैं) ॥१९॥
अब कहता है, 'गायें बैलों के साथ बुलाई गईं।' पशु ही इडा है। उन्हीं को परोक्ष रीति
से बुलाता है। 'बैलों के साथ' से तात्पर्य उनके जोड़े से है ॥२०॥
अब कहता है, 'सात होताओं से की गई इडा बुलाई गई।' इस प्रकार वह सात होताओं
द्वारा किये गये सोम यज्ञ के नाम से उसे बुलाता है ॥२१॥
अब कहता है, 'विजय पाने वाली (ततुरि) इडा बुलाई गई।' इस प्रकार उसको प्रत्यक्ष
रूप से बुलाता है। यह सब पापों को पार कर देती है। इसलिए इसको 'ततुरिः' कहा गया ॥२२॥
अब कहता है, 'भक्ष-मित्र बुलाया गया'। प्राण ही सखा भक्ष है। इससे प्राण को बुलाता
है । 'हेक्,' अर्थात् बुलाया गया। इससे वह शरीर को बुलाता है। इस प्रकार वह सबको बुलाता
है ॥२३॥