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सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary

by जगद्गुरु आदि शंकराचार्य

DevanagariHindipublished415 pages

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· ९ ,
देना उचित समझते हैं कि तंत्रोक्त समयाचार शुद्ध सात्विक उपासना
का मार्ग है और श्रीमच्छङ्कर भगवत्पाद की लेखनी से निकला हुआ
यह स्तोत्र इस बात का सर्वोपरि प्रमाण है । श्रीभगवत्पाद का लिखित
एक प्रपंचसार तंत्र भी मिलता है जिसे सैंट् अवैलन महोदय ने अपनी
तंत्रागम ग्रंथावलि में प्रकाशित किया है ।
श्रीविद्या पर परशुराम कल्पसूत्र, और उसके आधार पर संगृहीत
नित्योत्सव एवं भास्करराय का समस्त साहित्य पढने योग्य है ।
कैवल्य शर्मा ने सौंदर्य लहरी पर भाष्य लिखा है । संस्कृत जानने
वाले विद्वानों को श्रीविद्या के रहस्यों को जानने के लिये उपरोक्त ग्रंथ
अवश्य पढने चाहिये । श्रीविद्या के जिज्ञासुओं को त्रिपुरातापिनी, देवी,
त्रिपुरा और भावनोपनिषदें भी देखने योग्य हैं । त्रिपुरा और भावनो-
पनिषदों को हम परिशिष्ट में दे रहे हैं ।
अंग्रेजी में सौन्दर्य लहरी पर कई ग्रंथ लिखे जा चुके हैं, ३ ग्रंथ
हमारे देखने में आये हैं । दि थियोसोफिकल पब्लिशिंग हाउस,
अडयर का प्रकाशित् और पंडित स० सुब्रह्मण्य शास्त्री (F. T. S.)
और ट. र. श्रीनिवास अयंगार (B A. L. T.) की लिखित अंग्रेजी
प्रति हमारे सामने है, जिसको पढकर हमें यह ग्रंथ हिंदी में लिखने की
प्रेरणा मिली । हम उक्त दोनों सज्जनों के अनुगृहीत हैं क्योंकि उनके
ग्रंथ से अनेक विषयों पर हमें पर्याप्त सहायता मिली है ।
साथ ही मैं श्री स्वामी शंकरानन्द भारतीजी, जिनको साहित्य-
संसार महामहोपाध्याय वेदान्त वागीश श्री श्रीधर शास्त्री पाठक
प्रोफेसर डेक्कन कालेज पूना के नाम से परिचित हैं, डॉ. दुर्गाशंकर