सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary
by जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
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Read in contextग्रन्थ परिचय
भारतीय तत्वज्ञानियों में जगद्गुरू स्वामी शंकराचार्य्य का नाम
सर्वप्रथम है । संस्कृत साहित्य के पंडितों का आज भी अभाव नहीं
है किन्तु आध्यात्मिक अनुभूति और उच्च स्तर पर पहुंचने वाले साधन-
निष्ठ पुरुषों का अभाव सा ही है । पुस्तकों का साधारण अनुवाद कर
देना सरल सी बात है किन्तु ग्रंथ के गर्भ भाग में प्रवेश कर उसका
आध्यात्मिक तत्व निकालना और उसे साधन उपयुक्त बनाकर जनता
के सामने रखना बडा कठिन है । हम पुरातन शास्त्रज्ञों से यदि
आत्मा, मन, और प्राण की परिभाषा पूछे तो वे संतोष जनक उत्तर
नहीं दे सकते । इसको कोई अध्यात्मिक पुरुष अस्वीकार नहीं कर
सकता कि स्वामी शंकराचार्य्य ने सौंदर्य लहरी के १०३ श्लोकों में
उपासना का कितना गूढ रहस्य और योग साधनों की कितनी उप-
योगिता बतलायी है । भगवान शंकराचार्य के इस स्तोत्र मे जो
भगवती की स्तुति की गई है उसमें उनके उद्गार कितने श्रेष्ठ, स्पष्ट,
गंभीर, और उन्नत प्रदर्शित किये गये हैं । ऐसे बृहद्ग्रंथ का अनुवाद
करना और उसे आध्यात्मिक साधना से उपयुक्त कर देना सरल बात
नहीं है । उस पर तो वही महात्मा प्रकाश डाल सकते हैं जो आध्या-
त्मिक उच्च स्तर पर पहुंचे हुवे हैं और अधिकारी हैं ।
ब्रह्मनिष्ठ श्री स्वामी विष्णुतीर्थजी महाराज ने इस अनुपम ग्रंथ
का अनुवाद करके हिन्दी जगत का बडा उपकार किया है । प्रस्तुत
पुस्तक के कुछ पृष्ठों को पढने से ही स्वामीजी के गंभीर अध्ययन का
परिचय मिलता है ।
वेद, वेदान्त, उपनिषद, शास्त्र, तंत्रशास्त्र, योग, मंत्रशास्त्र
तथा भारतीय तथा पाश्चात्य तत्वज्ञानियों के वैज्ञानिक अनुसंधान के