सौन्दर्यलहरी (जगद्गुरु आदि शंकराचार्य - आनन्दलहरी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Saundaryalahari of Adi Shankaracharya with Hindi Commentary
by जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
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श्री १०८ स्वामीजी विष्णुतीर्थ महाराज ने श्री भगवत्पाद
शंकराचार्य की रची हुई सौन्दर्य-लहरी का हिन्दी भाषा में विद्वत्ता-
पूर्ण अनुवाद कर के यह पुस्तक प्रसिद्ध की है। यह उनका
अनुग्रह है।
श्री स्वामीजी कतिपय महान पुरुषों में से एक संत महात्मा
हैं। आप की विद्वत्ता और योगिक तपोबल प्रासादिक है।
सौन्दर्य लहरी में तत्वार्थ योगार्थ और मंत्रार्थ गूढ रीति से
और काव्यालंकारों से छुपा हुवा है। पाठक महाशयों को उसका
प्रतितार्थ यथायोग्य समझने में सहायता हो इस हेतु से श्री स्वामीजी
ने अपने विवरण की पुष्टी में वेदोपनिषद् शास्त्र के आधार स्थान
विशेष बार-बार उधृत किये हैं। वैसे ही नाडीयों एवं श्री चक्र के
नकशे भी देने का प्रयत्न किया है। जिससे पुस्तक पढ़ने वाले व
योग साधन व उपासना करने वाले भक्तजनों को विस्तृत माहिती
द्वारा सन्देह कटकर उनके मन को आनन्द लहरियों की प्राप्ती हो।
यह पुस्तक आदरणीय और संग्रहणीय है। इति शिवम्
देवास जूनियर
मध्यभारत विनायकराव बापूजी
ता. २५-३-४९ वैशंपायन
फा व. ११ संवत २००५ रिटायर्ड स्टेट कौन्सिलर.