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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 939 of 1855

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Page 939

ब्रह्माणि हि चकृषे वर्धनानि तावत्त इन्द्र मतिभिर्विद्विषम्:.
सुते सोमे सुतपाः शन्तमानि रान्द्रया क्रियास्म वक्षणानि यज्ञैः.. (६)
हे इंद्र! जिस प्रकार के स्तोत्रों को तुमने स्वयं बढ़ाया है, हम उसी प्रकार के स्तोत्रों की
बुद्धिपूर्वक रचना करते हैं. हे सोमपानकर्त्ता इंद्र! जब सोमरस निचूड़ जाता है, तब हम तुम्हारे
निमित्त अतिशय सुख देने वाले, सुदंर हव्य से युक्त एवं भावपूर्ण स्तोत्र बोलते हैं. (६)
स नो बोधि पुरोळाशं रराणः पिबा तु सोमं गोऋजीकमिन्द्र.
एदं बर्हिर्यजमानस्य सीदोरुं कृधि त्वायत उ लोकम्.. (७)
हे इंद्र! तुम प्रसन्न होकर हमारा पुरोडाश स्वीकार करो. गाय के दूध-दही से मिले
सोमरस को पिओ, यजमान द्वारा बिछाए हुए कुशों पर बैठो एवं अपने भक्त यजमान का घर
विस्तीर्ण करो. (७)
स मन्दस्वा ह्यनु जोषमुग्र प्र त्वा यज्ञास इमे अश्नुवन्तु.
प्रेमे हवासः पुरुहूतमस्मे आ त्वेयं धीरवस इन्द्र यम्याः.. (८)
हे उग्र इंद्र! तुम अपनी इच्छा के अनुकूल प्रसन्न बनो. ये सोम तुम्हें प्राप्त हों, हमारी
स्तुतियां बहुतों द्वारा बुलाए हुए इंद्र को प्राप्त हों. हे इंद्र! तुम्हें यह स्तुति हमारी रक्षा के निमित्त
विवश करे. (८)
तं वः सखायः सं यथा सुतेषु सोमेभिर्गी पृणता भोजमिन्द्रम्.
कुवित्त्तस्मा असति नो भराय न सुष्विमिन्द्रोऽवसे मृधाति.. (९)
हे स्तोताओ! तुम सोमरस निचूड़ जाने पर दाता इंद्र की अभिलाषाएं सोमरस द्वारा पूर्ण
करो. इंद्र के लिए अधिक मात्रा में सोमरस मिले, जिससे वे हमारा पोषण कर सकें. इंद्र
सोमरस निचोड़ने वाले यजमान की तृप्ति में बाधा नहीं डालते हैं. (९)
एवेदिन्द्रः सुते अस्तावि सोमे भरद्वाजेषु क्षयदिन्मघोनः.
असद्यथा जरित्र उत सूरिरिन्द्रो रायो विश्ववारस्य दाता.. (१०)
भरद्वाज ऋषि ने सोमरस निचूड़ जाने पर हव्यरूप धन वाले यजमान के स्वामी इंद्र की
स्तुति इस प्रकार की है, जिससे इंद्र स्तुतिकर्त्ता को सन्मार्ग की प्रेरणा देने वाले एवं सूर्य प्रिय
धन के दाता बनें. (१०)
सूक्त—२४ देवता—इंद्र
वृषा मद इन्द्रे श्लोक उक्था सचा सोमेषु सुतपा ऋजीषी.
अर्चत्र्यो मघवा नृभ्य उक्थैर्धुक्षो राजा गिरामक्षितोतिः.. (१)
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