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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 912 of 1855

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Page 912

श्रुष्टी रयिर्वाजो वृत्रतूर्ये दिवो वृष्टिरीड्यो रीतिरपाम्.. (१)
हे शोभन धन वाले अग्नि! सभी उत्तम धन तुमसे उत्पन्न हुए हैं. जिस प्रकार वृक्षों से
शाखाएं उत्पन्न होती हैं, उसी प्रकार तुमसे पशुसमूह, युद्ध में शत्रुओं को जीतने वाली शक्ति
एवं आकाश से वर्षा शीघ्र उत्पन्न होती है. तुम सबके स्तुतियोग्य बनकर जल को उत्पन्न करते
हो. (१)
त्वं भगो न आ हि रत्नमिषे परिज्मेव क्षयसि दस्मवर्चाः.
अग्ने मित्रो न बृहत ऋतस्यासि क्षत्ता वामस्य देव भूरेः.. (२)
हे सेवा करने योग्य अग्नि! हमें रमणीय धन दो. हे दर्शनीय प्रकाश वाले अग्नि! तुम वायु
के समान सब जगह फैलो. अग्नि देव! तुम मित्र के समान विशाल यज्ञसाधनों एवं पर्याप्त धन
के दाता बनो. (२)
स सत्पतिः शवसा हन्ति वृत्रमग्ने विप्रो वि पणेर्भर्ति वाजम्.
यं त्वं प्रचेत ऋतजात राया सजोषा नप्त्रापां हिनोषि.. (३)
हे उत्तम ज्ञानसंपन्न व यज्ञ के निमित्त उत्पन्न अग्नि! तुम जल के पुत्र विद्युत् से मिलकर
जिस व्यक्ति को धन देना चाहते हो, वह सज्जनों का रक्षक व बुद्धिमान् होकर शक्ति द्वारा
शत्रुओं का नाश करता है तथा पणि लोगों की शक्ति छीन लेता है. (३)
यस्ते सूनो सहसो गीर्भिरुक्थैर्यज्ञैर्मर्तो निशितिं वेद्यानट्.
विश्वं स देव प्रति वारमग्ने धत्ते धान्यं१ पत्यते वस्वयैः.. (४)
हे बलपुत्र अग्नि देव! जो यजमान स्तुति वचनों, स्तोत्रों एवं यज्ञसाधनों द्वारा यज्ञवेदी में
तुम्हारा तीक्ष्ण प्रकाश पहुंचाता है, वह पर्याप्त अन्न धारण करता है तथा संपत्तियों को पाता
है. (४)
ता नृभ्य आ सौश्रवसा सुवीराग्ने सूनो सहसः पुष्यसे धाः.
कृणोषि यच्छवसा भूति पश्वो वयो वृकायारये जसुरये.. (५)
हे बलपुत्र अग्नि! हमारे पोषण के निमित्त तुम शत्रुओं से लाया हुआ शोभन अन्न हमें
संतान सहित दो. तुम पशुओं व दूधदहीरूप जो अन्न दानहीन असुरों से प्राप्त करते हो वह
अधिक मात्रा में हमें दो. (५)
वद्मा सूनो सहसो नो विहाया अग्ने तोकं तनयं वाजि नो दाः.
विश्वाभिर्गीर्भिरभि पूर्तिमश्यां मदेम शतहिमाः सुवीराः.. (६)
हे बलपुत्र एवं महान् अग्नि! तुम हमारे हितोपदेशक बनो तथा हमें अन्न के साथ-साथ
पुत्र-पौत्र दो. हम समस्त स्तुतियों द्वारा अपनी कामनाओं को प्राप्त करें तथा सौ वर्ष तक
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