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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 864 of 1855

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Page 864

समान है. (४)
सनत्साश्व्यं पशुमुत गव्यं शतावयम्.
श्यावाश्वस्तुताय या दोर्वीरायोपबर्बृहत्.. (५)
जिस रानी शशीयसी ने मुझ श्यावाश्व द्वारा स्तुत राजा तरंत को दोनों भुजाओं में भर
लिया था, वही मुझे घोड़ा, गाय एवं मेषों के रूप में सैकड़ों प्रकार का पशु धन दें. (५)
उत त्वा स्त्री शशीयसी पुंसो भवति वस्यसी. अदेवत्रादराधसः.. (६)
देवों की स्तुति न करने वाले तथा धनदान न करने वाले पुरुष से स्त्री शशीयसी बहुत
महान् है. (६)
वि या जानाति जसुरिं वि तृष्यन्तं वि कामिनम्. देवत्रा कृणुते मनः.. (७)
जो शशीयसी व्यथित, प्यासे एवं धनाभिलाषी को जानती है, वह अपने मन में देवों की
प्रसन्नता के लिए दान का विचार करती है. (७)
उत घा नेमो अस्तुतः पुमाँ इति ब्रुवे पणिः. स वैरदेय इत्समः.. (८)
स्तुति करने वाला मैं कहता हूं कि शशीयसी के प्रति तरंत की उचित प्रशंसा नहीं हुई. वे
देवों के उद्देश्य से दान करने में सदा समान हैं. (८)
उत मेऽरपद्युवतिर्मन्दुषी प्रति श्यावाय वर्तनिम्.
वि रोहिता पुरुमीळहाय येमतुर्विप्राय दीर्घयशसे.. (९)
प्राप्तयौवना एवं प्रसन्नचित्त शशीयसी ने मुझ श्यावाश्व को मार्ग बताया. उसके दिए हुए
लाल रंग के घोड़े मुझे परम यशस्वी एवं मेधावी पुरुमीढ के पास ले गए. (९)
यो मे धेनूनां शतं वैददश्विर्यथा ददत्. तरन्तइव मंहना.. (१०)
विददश्व के पुत्र पुरुमीढ ने भी तुरंत राजा के समान ही हमें सौ गाएं एवं अन्य बहुत सी
संपत्तियां दी हैं. (१०)
य ईं वहन्त आशुभिः पिबन्तो मदिरं मधु. अत्र श्रवांसि दधिरे.. (११)
जो मरुद्गण तेज घोड़ों द्वारा लाए गए थे, वे मदकारक सोमरस पीते हुए यहां भांति-
भांति की स्तुतियां सुनते हैं. (११)
येषां श्रियाधि रोदसी विभ्राजन्ते रथेष्व्वा. दिवि रुक्मइवोपरि.. (१२)
जिन मरुतों की शोभा से धरती और आकाश चमक उठते हैं, वे रथों पर इस प्रकार
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