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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 848 of 1855

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Page 848

छन्दः स्तुभः कुभन्यव उत्समा कीरिणो नृतुः.
ते मे के चिन्न तायव ऊमा आसन्दृशि त्विषे.. (१२)
छंदों द्वारा स्तुति करने वाले एवं जल के अभिलाषी स्तोताओं ने मरुतों की प्रार्थना की
एवं प्यासे गोतम के लिए कुआं बनवाया. मरुतों में से कुछ ने चोर के समान छिपकर हमारी
रक्षा की थी एवं कुछ स्पष्ट रूप से हमारी शक्ति बढ़ाने में कारण बने थे. (१२)
य ऋष्वा ऋष्टिविद्युतः कवयः सन्ति वेधसः.
तमृषे मारुतं गणं नमस्या रमया गिरा.. (१३)
हे श्यावाश्व ऋषि! तुम दर्शनीय, विद्युतरूपी आयुध धारण करने वाले, बुद्धिमान् एवं
सबके निर्माता मरुद्गणों की रमणीय वाक्यों द्वारा स्तुति करो. (१३)
अच्छ ऋषे मारुतं गणं दाना मित्रं न योषणा.
दिवो वा धृष्णव ओजसा स्तुता धीभिरिषण्यत.. (१४)
हे ऋषि! तुम हव्य देते हुए एवं स्तुतियां करते हुए मरुतों के समीप आदित्य के समान
जाओ. हे शक्ति द्वारा शत्रुओं को हराने वाले मरुतो! तुम हमारी स्तुतियां सुनकर स्वर्गलोक से
हमारे यज्ञ में आओ. (१४)
नू मन्वान एषां देवाँ अच्छा न वक्षणा.
दाना सचेत सूरिभिर्यामश्रुतेभिरज्जिभिः.. (१५)
स्तोता मरुतों को स्तुति द्वारा शीघ्र प्राप्त करके अन्य देवों को पाने की अभिलाषा नहीं
करते. वे ज्ञानी, शीघ्रगतिशील के रूप में प्रसिद्ध एवं फल देने वाले मरुतों से दान पाते हैं.
(१५)
प्र ये मे बन्ध्वेषे गां वोचन्त सूरयः पृश्निं वोचन्त मातरम्.
अधा पितरमिष्मिणं रुद्रं वोचन्त शिक्वसः.. (१६)
जब मैं अपने बंधुओं को खोज रहा था, तब समर्थ मरुतों ने मुझे बताया कि पृश्नि उनकी
माता है. उन्होंने अन्न के स्वामी रुद्र को अपना पिता बताया. (१६)
सप्त मे सप्त शाकिन एकमेका शता ददुः.
यमुनायामधि श्रुतमुद्राधो गव्यं मृजे नि राधो अश्व्यं मृजे.. (१७)
उनचास संख्या वाले शक्तिशाली मरुतों ने एकत्र होकर मुझे सैकड़ों गाएं दीं. मरुतों
द्वारा दिए गए गोरूप अथवा अश्वरूप धन को हमने गंगा तट पर प्राप्त किया. (१७)
सूक्त—५३ देवता—मरुद्गण
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