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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 820 of 1855

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Page 820

यो रोहितौ वाजिनौ वाजिनीवान्त्रिभिः शतैः सचमानावदिष्ट.
यूने समस्मै क्षितयो नमन्तां श्रुतरथाय मरुतो दुवोया.. (६)
हे मरुतो! जिस अन्नस्वामी राजा श्रुतरथ ने हमें लाल रंग के दो घोड़े एवं तीन सौ गाएं
दी थीं, उस तरुण राजा के लिए सभी प्रजाएं नम्र बनें. (६)
सूक्त—३७ देवता—इंद्र
सं भानुना यतते सूर्यस्याजुह्वानो घृतपृष्ठः स्वञ्चाः.
तस्मा अमृध्रा उषसो व्युच्छान्य इन्द्राय सुनवामेत्याह.. (१)
सूर्य के तेज के साथ सभी जगह बुलाए जाते हुए अग्नि प्रदीप्त ज्वालाओं के कारण
प्रकाशित होने का प्रयत्न करते हैं. उस समय जो यजमान कहता है कि मैं इंद्र के निमित्त
सोमरस निचोड़ता हूं. उसके प्रति उषा हिंसापूर्ण नहीं रहती है. (१)
समिद्धाग्निर्वन्वत्स्तीर्णबर्हिर्युक्तग्रावा सुतसोमो जराते.
ग्रावाणो यस्येषिरं वदन्त्यदध्वर्युर्हविषाव सिन्धुम्.. (२)
अग्नि प्रज्वलित करने वाला, कुश बिछाने वाला एवं हाथ में पत्थर उठाकर सोम
निचोड़ने वाला यजमान ध्यानपूर्वक स्तुति करता है. जिस अध्वर्यु का पत्थर मधुर शब्द करता
है, वह हव्य के साथ नदी में स्नान करता है. (२)
वधूरियं पतिमिच्छन्त्येति य ईं वहाते महिषीमिषिराम्.
आस्य श्रवस्याद्रथ आ च घोषात्यूरू सहस्रा परि वर्तयाते.. (३)
पत्नी यज्ञ में अपने पति के गमन की इच्छा करती हुई, उसके पीछे चलती है. इंद्र इसी
प्रकार की महिषी को लाते हैं. अधिक शब्द करने वाला इंद्र का रथ हमारे समीप धन लावे एवं
अगणित प्रकार की संपत्तियां चारों ओर बिखेरे. (३)
न स राजा व्यथते यस्मिन्निन्द्रस्तीव्रं सोमं पिबति गोसखायम्.
आ सत्वनैरजति हन्ति वृत्रं क्षेति क्षितीः सुभगो नाम पुष्यन्.. (४)
वह राजा कभी दुःखी नहीं होता, जिसके यज्ञ में इंद्र दूध में मिला हुआ नशीला सोमरस
पीते हैं. वे अपने सेवकों के साथ चलते हैं, शत्रुओं को मारते हैं, प्रजाओं की रक्षा करते हैं एवं
सुखपूर्वक इंद्र की स्तुतियों में वृद्धि करते हैं. (४)
पुष्यात्क्षेमे अभि योगे भवात्युभे वृत्तौ संयती सं जयाति.
प्रियः सूर्ये प्रियो अग्ना भवाति य इन्द्राय सुतसोमो ददाशत्.. (५)
इंद्र को निचुड़ा हुआ सोमरस देने वाला व्यक्ति बंधुबांधवों का पोषण करता है, प्राप्त
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