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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 809 of 1855

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Page 809

समत्र गावोऽभितोऽनवन्तेहेह वत्सैर्वियुता यदासन्.
सं ता इन्द्रो असृजदस्य शाकैर्यदीं सोमासः सुषुता अमन्दन्.. (१०)
नमुचि द्वारा चुराई गई गाएं अपने बछड़ों से बिछुड़ जाने पर इधर-उधर भटक रही थीं.
वभ्रु ऋषि द्वारा निचोड़े गए सोमरस ने इंद्र को प्रसन्न किया, तब इंद्र ने शक्तिशाली मरुतों के
साथ मिलकर वभ्रु की गायों को बिछुड़े हुए बछड़ों से मिला दिया था. (१०)
यदीं सोमा बभ्रुधूता अमन्दन्नरोरवीद्वृषभः सादनेषु.
पुरन्दरः पपिवाँ इन्द्रो अस्य पुनर्गवामददादुस्रियाणाम्.. (११)
जब वभ्रु द्वारा निचोड़े गए सोमरस ने इंद्र को प्रसन्न किया था, तब कामवर्षी इंद्र ने युद्ध
में अधिक शब्द किया था. पुरंदर इंद्र ने सोमरस पिया एवं वभ्रु की दुधारू गाएं उन्हें वापस
दिलवा दीं. (११)
भद्रमिदं रुशमा अग्ने अक्रन्गवां चत्वारि ददतः सहस्रा.
ऋणञ्चयस्य प्रयता मघानि प्रत्यग्रभीष्म नृतमस्य नृणाम्.. (१२)
हे अग्नि! ऋणंचय राजा के सेवकों ने, जो रुशम देश के निवासी थे, मुझे चार हजार
गाएं देकर भला काम किया था. सर्वश्रेष्ठ नेता ऋणंचय द्वारा दिए गए गोरूप धन को मैंने
स्वीकार किया था. (१२)
सुपेशसं माव सृजन्त्यस्तं गवां सहस्रै रुशमानो अग्ने.
तीव्रा इन्द्रमममन्दुः सुतासोऽक्तोर्व्युष्टौ परितक्म्यायाः.. (१३)
हे अग्नि! रुशम देश की प्रजाओं ने मुझे अलंकार, वस्त्रादि से सुशोभित करके हजारों
गाएं दी थीं. रात बीतने पर अर्थात् प्रातः निचोड़े हुए सोमरस ने इंद्र को प्रसन्न किया. (१३)
औच्छत्सा रात्री परितक्म्या याँ ऋणञ्चये राजनि रुशमानाम्.
अत्यो न वाजी रघुरज्यमानो बभ्रुश्चत्वार्यसनत्सहस्रा.. (१४)
रुशम देश के राजा ऋणंचय के समीप ही मेरी वह गतिशील रात बीत गई थी. वेगवान्
घोड़े के सामन शीघ्रतापूर्वक आने वाले वभ्रु ऋषि ने चार हजार गाएं प्राप्त की थीं. (१४)
चतुःसहस्रं गव्यस्य पश्वः प्रत्यग्रभीष्म रुशमेष्वग्ने.
घर्मश्चित्तप्तः प्रवृजे य आसीदयस्मयस्तम्वादाम विप्राः.. (१५)
हे अग्नि! हमने रुशम देश की प्रजाओं से चार हजार गाएं प्राप्त की थीं. उनके पास
महावीर के समान सोने का जो उत्तम वर्ण कलश यज्ञ के काम आने के लिए था, उसे हमने
गायों का दूध काढ़ने के लिए ले लिया. (१५)
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