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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 808 of 1855

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Page 808

अश्मानं चिच्छवसा दिद्युतो वि विदो गवामूर्वमुस्रियाणाम्.. (४)
हे इंद्र! तुमने जन्म लेते ही अपना मन स्थिर किया एवं अकेले ही अनगिनत राक्षसों से
युद्ध करने के लिए चल पड़े. तुमने अपनी शक्ति द्वारा गायों को छिपाने वाले पर्वत को तोड़
डाला था एवं दुधारू गायों को पाया था. (४)
परो यत्त्वं परम आजनिष्ठाः परावति श्रुत्यं नाम बिभ्रत्.
अतश्चिदिन्द्रादभयन्त देवा विश्वा अपो अजयद्दासपत्नीः.. (५)
हे सर्वोच्च एवं सर्वोत्कृष्ट इंद्र! तुमने दूरदूर तक प्रसिद्ध नाम को धारण करते हुए जन्म
लिया था. उस समय सभी देव तुमसे डर गए थे एवं तुमने वृत्र द्वारा रोके गए समस्त जलों को
जीत लिया था. (५)
तुभ्येदेते मरुतः सुशेवा अर्चन्त्यर्कं सुन्वन्त्यन्धः.
अहिमोहानमप आशयानं प्र मायाभिर्मायिनं सक्षदिन्द्रः.. (६)
हे इंद्र! ये उत्तम सुख देने वाले स्तोता स्तुतियों द्वारा तुम्हारी प्रशंसा करते हैं एवं तुम्हें
पिलाने के लिए अन्नरूपी सोम निचोड़ते हैं. इंद्र ने अपनी शक्तियों द्वारा देवों को बाधा पहुंचाने
वाले एवं जलसमूह को रोककर सोए हुए मायावी वृत्र राक्षस को हराया था. (६)
वि षू मृधो जनुषा दानमिन्वन्नहन्रगावा मघवन्त्सञ्चकानः.
अत्रा दासस्य नमुचेः शिरो यद्वर्तयो मनवे गातुमिच्छन्.. (७)
हे धनस्वामी इंद्र! हमारी स्तुति सुनकर तुमने देवों को बाधा पहुंचाने वाले वृत्र को वज्र से
मारते हुए जन्म से ही उसके अनुचर राक्षस आदि की हिंसा की थी. हे इंद्र! इस युद्ध में तुम
मुझ मनु को सुख देने की इच्छा से नमुचि नामक दास का सिर तोड़ दो. (७)
युजं हि मामकृथा आदिदिन्द्र शिरो दासस्य नमुचेर्मथायन्.
अश्मानं चित्स्वर्यं१ वर्तमानं प्र चक्रियेव रोदसी मरुद्भ्यः.. (८)
हे इंद्र! जिस प्रकार तुमने गर्जन करने वाले एवं घूमते हुए बादल को नष्ट किया था, उसी
प्रकार नमुचि नामक दास का सिर तोड़कर उसी समय हमारे साथ मित्रता की थी. उस समय
मरुतों के भय से धरती और आकाश पहिए की तरह घूमने लगे थे. (८)
स्त्रियो हि दास आयुधानि चक्रे किं मा करन्नबला अस्य सेनाः.
अन्तर्ह्यख्यदुभे अस्य धेने अथोप प्रैद्युधये दस्युमिन्द्रः.. (९)
नमुचि नामक दास ने स्त्रियों को अपने युद्ध का साधन बनाया. इसकी सारी सेना मेरा
क्या कर सकती है? यह सोचते हुए इंद्र ने उनके बीच से उसकी प्यारी दो सुंदरियों को अपने
घर में रख लिया एवं नमुचि से लड़ने के लिए चल दिए. (९)
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