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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 751 of 1855

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Page 751

विदुष्टे विश्वा भुवनानि तस्य ता प्र ब्रवीषि वरुणाय वेधः.
त्वं वृत्राणि शृण्विषे जघन्वान्त्वं वृताँ अरिणा इन्द्र सिन्धून्.. (७)
हे वरुण! तुम्हारे कामों को सारा संसार जानता है. हे स्तोता! वरुण के निमित्त स्तुति
बोलो. हे इंद्र! ऐसा सुना जाता है कि तुमने बैरियों का वध किया था. तुमने ढकी हुई नदियों
को प्रवाहित किया था. (७)
अस्माकमत्र पितरस्त आसन्सप्त ऋषयो दौर्गहे बध्यमाने.
त आयजन्त त्रसदस्युमस्या इन्द्रं न वृत्रतुरमर्धदेवम्.. (८)
दुर्गह के पुत्र पुरुकुत्स जब कैद कर लिए गए तो सप्तऋषि हमारे इस राज्य के
पालनकर्त्ता बने थे. उन्होंने पुरुकुत्स की पत्नी के कल्याण के लिए यज्ञ करके त्रसदस्यु को
पाया था. वह इंद्र के समान शत्रुनाशक एवं आधा देव था. (८)
पुरुकुत्सानी हि वामदाशद्धव्येभिरिन्द्रावरुणा नमोभिः.
अथा राजानं त्रसदस्युमस्या वृत्रहणं दथुरर्धदेवम्.. (९)
हे इंद्र एवं वरुण! सप्तऋषियों की प्रेरणा से पुरुकुत्स की पत्नी ने हव्य एवं स्तुतियों
द्वारा तुम्हें प्रसन्न किया था. इसके बाद तुमने उसे शत्रुनाशकारी एवं आधे देव त्रसदस्यु को
प्रदान किया था. (९)
राया वयं ससवांसो मदेम हव्येन देवा यवसेन गावः.
तां धेनुमिन्द्रावरुणा युवं नो विश्वाहा धत्तमनपस्फुरन्तीम्.. (१०)
हम तुम दोनों की स्तुति करके धन द्वारा प्रसन्न हों. देवगण हव्य द्वारा एवं गाएं घास से
संतुष्ट हों. हे इंद्र एवं वरुण! विश्व का नाश करने वाले तुम दोनों हमें हिंसारहित धन दो. (१०)
सूक्त—४३ देवता—अश्विनीकुमार
क उ श्रवत्कतमो यज्ञियानां वन्दारु देवः कतमो जुषाते.
कस्वेमां देवीममृतेषु प्रेष्ठां हृदि श्रेषाम सुष्टुतिं सुहव्याम्.. (१)
यज्ञ के योग्य देवों में कौन देव इस स्तुति को सुनेगा? कौन वंदनशील देव इसे स्वीकार
करेगा? हम इस अतिशय प्रिय, द्युतियुक्त, शोभन-अन्न से युक्त, इस उत्तम स्तुति को किस देव
के हृदय में स्थान दिलाएं? (१)
को मृळाति कतम आगमिष्ठो देवानामु कतमः शम्भविष्ठः.
रथं कमाहुर्द्रवदश्वमाशुं यं सूर्यस्य दुहितावृणीत.. (२)
हमें कौन सा देवता सुखी करेगा? कौन देवता हमारे यज्ञ में सबसे पहले आएगा? देवों
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