ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextहे इंद्र! हम तुमसे दस घड़े भर कर स्वर्ण मांगते हैं. तुम हमें इससे अधिक देते हो. (१९)
भूरिदा भूरि देहि नो मा दभ्रं भूर्या भर. भूरि घेदिन्द्र दित्ससि.. (२०)
हे अधिक दान करने वाले इंद्र! हमें बहुत सा धन दो. थोड़ा मत दो. तुम हमें बहुत धन
देना चाहते हो. (२०)
भूरिदा ह्यसि श्रुतः पुरुत्रा शूर वृत्रहन्. आ नो भजस्व राधसि.. (२१)
हे वृत्रनाशक एवं शूर इंद्र! तुम बहुत से यजमानों में अधिक देने वाले के रूप में प्रसिद्ध
हो. तुम हमें धन का भागी बनाओ. (२१)
प्र ते बभ्रू विचक्षण शंसामि गोषणो नपात्. माभ्यां गा अनु शिश्रथः.. (२२)
हे बुद्धिमान् इंद्र! हम तुम्हारे पीले रंग वाले दोनों घोड़ों की प्रशंसा करते हैं. हे गाय देने
वाले इंद्र! तुम स्तोताओं का नाश नहीं करते. इन दो घोड़ों द्वारा तुम हमारी गायों को नष्ट मत
करना. (२२)
कनीनकेव विद्रधे नवे द्रुपदे अर्भके. बभ्रू यामेषु शोभेते.. (२३)
हे इंद्र! तुम्हारे पीले रंग के घोड़े यज्ञ में इस प्रकार सुशोभित होते हैं, जिस प्रकार दृढ़,
नए एवं छोटे से वृक्ष में सुंदर कठपुतली छिपे रूप में शोभा पाती हैं. (२३)
अरं म उस्रयाम्येऽरमनुस्रयाम्ये. बभ्रू यामेष्वसिधा.. (२४)
हे इंद्र! हम चाहे बैल जुड़े हुए रथ में बैठकर चलें अथवा बिना उसके पैदल चलें, तुम्हारे
हिंसा न करने वाले पीले घोड़े हमारी यात्रा में कल्याण करें. (२४)
सूक्त—३३ देवता—ऋभुगण
प्र ऋभुभ्यो दूतमिव वाचमिष्य उपस्तिरे श्वैतरीं धेनुमीळे.
ये वातजूतास्तरणिभिरेवैः परि द्यां सद्यो अपसो बभूवुः.. (१)
हम ऋभुओं के समीप अपनी स्तुतियों को दूत के समान भेजते हैं. हम सोमरस तैयार
करने के लिए ऋभुओं से दुधारू गाय मांगते हैं. ऋभुगण वायु के समान तीव्र गतिशील तथा
संसार के उपकारक कर्म करने वाले हैं एवं वेगशाली घोड़ों की सहायता से तुरंत आकाश को
सभी ओर से घेर लेते हैं. (१)
यदारमक्रन्नृभवः पितृभ्यां परिविष्टी वेषणा दंसनाभिः.
आदिद्देवानामुप सख्यमायन्धीरासः पुष्टिमवहन्मनायै.. (२)
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