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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 729 of 1855

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Page 729

हे वृत्रनाशक एवं धनस्वामी इंद्र! उसके पश्चात् तुम क्रोधित हुए एवं दिन के समय
आकाश में दनुपुत्र वृत्र का नाश किया. (७)
एतद्घेदुत वीर्य१मिन्द्र चकर्थ पौंस्यम्. स्त्रियं यद्दुह॑णायुवं वधीर्दुहितरं दिवः.. (८)
हे इंद्र! तुमने अपनी शक्ति को सामर्थ्यपूर्ण बनाया और स्वर्ग की पुत्री उस उषा का वध
किया जो तुम्हें मारना चाहती थी. (८)
दिवश्चिद्घा दुहितरं महान्महीयमानाम्. उषासमिन्द्र सं पिणक्.. (९)
हे इंद्र! तुमने स्वर्ग की पुत्री तथा पूजा के योग्य उषादेवी को पीस डाला. (९)
अपोषा अनसः सरत्संपिष्टादह बिभ्युषी. नि यत्सीं शिश्नथद्वृषा.. (१०)
कामवर्षी इंद्र ने जब उषा की गाड़ी तोड़ डाली तो डरी हुई उषा टूटी हुई गाड़ी से नीचे
उतरी. (१०)
एतदस्या अनः शये सुसम्पिष्टं विपाश्या. ससार सीं परावतः.. (११)
इंद्र द्वारा तोड़ी गई उषा की गाड़ी विपाशा नदी के किनारे गिरी. उषा उससे दूर चली
गई. (११)
उत सिंधुं विबाल्यं वितस्थानामधि क्षमि. परि ष्ठा इन्द्र मायया.. (१२)
हे इंद्र! तुमने अपने बुद्धिबल से जलपूर्ण एवं स्थित नदियों को धरती के ऊपर सभी
जगह स्थापित किया. (१२)
उत शुष्णस्य धृष्णुया प्र मृक्षो अभि वेदनम्. पुरो यदस्य संपिणक्.. (१३)
हे पराजयकारी इंद्र! जब तुमने शुष्ण असुर के नगरों को भली प्रकार नष्ट किया था,
तभी उसका धन भी छीन लिया था. (१३)
उत दासं कौलितरं बृहतः पर्वतादधि. अवाहन्निन्द्र शम्बरम्.. (१४)
हे इंद्र! तुमने कुलतर के पुत्र शंबर नामक दास को बृहत् पर्वत पर अधोमुख कर मारा
था. (१४)
उत दासस्य वर्चिनः सहस्राणि शतावधीः. अधि पञ्च प्रधीँरिव.. (१५)
हे इंद्र! जिस प्रकार पहिए के चारों ओर शंकु होते हैं, उसी प्रकार वचि नामक दास के
चारों ओर हजार-पांच सौ सेवक थे. तुमने उनका वध किया. (१५)
उत त्यं पुत्रमग्रुवः परावृक्तं शतक्रतुः. उक्थेष्विन्द्र आभजत्.. (१६)
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