ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextप्रजापति की पूजा हम हव्य द्वारा करें. (३)
यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः.
यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (४)
जिसकी महिमा से ये हिम वाले पर्वत उत्पन्न हुए हैं एवं यह सागर सहित धरती जिसकी
कही जाती है, ये सब दिशाएं जिसकी भुजाएं हैं, हम उन्हीं प्रजापति की हव्य द्वारा पूजा करें.
(४)
येन द्यौरुग्रा पृथिवी च दृळ्हा येन स्वः स्तभितं येन नाकः.
यो अन्तरिक्षे रजसो विमानः कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (५)
जिन्होंने द्यौ एवं विस्तृत धरती को स्थिर किया है, जिन्होंने स्वर्ग तथा आदित्य को धारण
किया है एवं जो अंतरिक्ष में जल को बनाने वाले हैं, उन्हीं प्रजापति की पूजा हम हव्य द्वारा
करें. (५)
यं क्रन्दसी अवसा तस्तभाने अभ्यैक्षेतां मनसा रेजमाने.
यत्राधि सूर उदितो विभाति कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (६)
जिन्होंने रक्षा के विचार से शब्द करती हुई द्यावा-पृथिवी को स्थिर किया एवं दीप्तियुक्त
इन दोनों को महिमा वाला समझा, जिनके आधार के कारण उदित हुआ सूर्य प्रकाशित होता
है, हम उन्हीं प्रजापति की पूजा हव्य द्वारा करें. (६)
आपो ह यद् बृहतीर्विश्वमायन्गर्भं दधाना जनयन्तीरग्निम्.
ततो देवानां समवर्ततासुरेकः कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (७)
विस्तृत जल ने सारे संसार को ढक लिया था, जल ने गर्भ धारण करके अग्नि, आकाश
आदि को जन्म दिया. इसके बाद देवों का एकमात्र रक्षक उत्पन्न हुआ. हम हव्य द्वारा उन्हीं
प्रजापति की पूजा करते हैं. (७)
यश्चिदापो महिना पर्यपश्यद्दक्षं दधाना जनयन्तीर्यज्ञम्.
यो देवेष्वधि देव एक आसीत्कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (८)
प्रजापति को धारण करने वाले एवं यज्ञ को उत्पन्न करने वाले जल को प्रजापति ने
अपने महत्त्व से देखा. जो सभी देवों के मध्य एकमात्र देव हुए, हम उन्हीं प्रजापति की हव्य
द्वारा सेवा करें. (८)
मा नो हिंसीज्जनिता यः पृथिव्या यो वा दिवं सत्यधर्मा जजान.
यश्चापश्चन्द्रा बृहतीर्जजान कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (९)
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