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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1778 of 1855

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Page 1778

हे अभिलाषापूरक इंद्र! बहुत से अन्न संग्रह करने वाले लोग तुम्हें अनेक स्थानों में
सोमरस पीने के लिए बुलाते हैं. हमारा तैयार किया हुआ सोम तुम्हें सबसे अधिक मीठा लगे
एवं तुम उन्हें चाहो. (७)
प्र त इन्द्र पूर्व्याणि प्र नूनं वीर्या वोचं प्रथमा कृतानि.
सतीनमन्युरश्रथायो अद्रिं सुवेदनामकृणोर्ब्रह्मणे गाम्.. (८)
हे इंद्र! प्राचीनकाल में तुमने सबसे पहले जो वीरता दिखाई थी, मैं उसकी निश्चय ही
प्रशंसा करता हूं. तुमने जल बरसाने की इच्छा से मेघ को विदीर्ण किया एवं स्तोता के लिए
गाय पाना सुलभ बनाया. (८)
नि षु सीद गणपते गणेषु त्वामाहुर्विप्रतमं कवीनाम्.
न ऋते त्वत्क्रियते किंचनारे महामर्कं मघवञ्चित्रमर्च.. (९)
हे गणों के स्वामी इंद्र! तुम स्तोताओं के समूहों में बैठो. तुम कर्मकर्त्ता व्यक्तियों में
सर्वाधिक कुशल हो, पास या दूर, तुम्हारे बिना कोई भी यज्ञकार्य नहीं होता है. हे धन स्वामी
इंद्र! हमारे स्तुतिमंत्रों को विस्तृत और विचित्र बनाओ. (९)
अभिख्या नो मघवन्नाधमानान्सखे बोधि वसुपते सखीनाम्.
रणं कृधि रणकृत्सत्यशुष्माभक्ते चिदा भजा राये अस्मान्.. (१०)
हे धनस्वामी इंद्र! हम स्तुतिकर्त्ताओं को तेजस्वी बनाओ. हे धनपालक एवं मित्र इंद्र!
हमें अपना मित्र जानो. ये युद्धकर्त्ता एवं सच्ची शक्ति वाले इंद्र! धन की संभावना से रहित
स्थान में ही हमें धन प्राप्त कराओ. (१०)
सूक्त-११३ देवता—इंद्र
तमस्य द्यावापृथिवी सचेतसा विश्वेभिर्देवैरनु शुष्ममावताम्.
यदैत्कृण्वानो महिमानमिन्द्रियं पीत्वी सोमस्य क्रतुमाँ अवर्धत.. (१)
द्यावा-पृथिवी सब देवों के साथ मिलकर एकचित्त से इंद्र की शक्ति की रक्षा करें. जब
वीरता के कार्य करतेकरते इंद्र ने अपना महत्त्व प्राप्त किया, तब सोमरस पीने वाले एवं
कर्मकर्त्ता इंद्र बढ़े. (१)
तमस्य विष्णुर्महिमानमोजसांशुं दधन्वान्मधुनो वि रप्शते.
देवेभिरिन्द्रो मघवा सयावभिर्वृत्रं जघन्वाँ अभवद्वरेण्यः.. (२)
विष्णु ने सोमलता का टुकड़ा देकर उत्साह के साथ इंद्र की उस महिमा की घोषणा की
है. धनस्वामी इंद्र ने साथ चलने वाले देवों की सहायता से वृत्र का वध किया और सर्वोत्तम
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