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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1749 of 1855

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Page 1749

बृहस्पति से उत्पन्न फलसहित, फलरहित, पुष्परहित एवं पुष्पयुक्त ओषधियां हमें रोग से
बचावें. (१५)
मुञ्चन्तु मा शपथ्या३दथो वरुण्यादुत.
अथो यमस्य पड्बीशात्सर्वस्माद्देवकिल्बिषात्. (१६)
ओषधियां मुझे झूठी कसम खाने के पाप से, वरुण के पाश से, यम की बेड़ी से एवं
सभी देवों के पाश से बचावें. (१६)
अवपतन्तीरवदन्दिव ओषधयस्परि. यं जीवमश्नवामहै न स रिष्याति पूरुषः. (१७)
ओषधियों ने स्वर्ग से नीचे उतरते समय कहा था कि हम जिस जीवित व्यक्ति में प्रवेश
कर जाती हैं, वह नष्ट नहीं होता. (१७)
या ओषधीः सोमराज्ञीर्बह्वीः शतविचक्षणाः. तासां त्वमस्युत्तमारं कामाय शं हृदे..
(१८)
हे ओषधि! जो ओषधियां सोम राजा की प्रजा हैं, अगणित एवं अति कुशल हैं, तुम उन
में उत्तम हो. तुम अभिलाषा को पूर्ण करके मन को शांति दो. (१८)
या ओषधीः सोमराज्ञीर्विष्ठिताः पृथिवीमनु. बृहस्पतिप्रसूता अस्यै सं दत्त वीर्यम्..
(१९)
जो ओषधियां! सोम राजा की प्रजा हैं, स्वर्ग से आकर धरती पर फैली हैं एवं वृहस्पति
से उत्पन्न हैं, वे इस रोगी को शक्ति दें. (१९)
मा वो रिषत्खनिता यस्मै चाहं खनामि वः. द्विपच्चतुष्पदस्माकं सर्वमस्त्वनातुरम्..
(२०)
हे ओषधियो! मैं तुम्हारा खोदने वाला हूं. तुम मुझे नष्ट मत करना. मैं जिनके लिए तुम्हें
खोदता हूं, उसे भी नष्ट मत करना. हमारे दो पैर एवं चार पैरों वाले जीव रोगरहित हों. (२०)
याश्चेदमुपशृण्वन्ति याश्च दूरं परागताः. सर्वाः सङ्गत्य वीरुधोऽस्यै सं दत्त वीर्यम्.. (२१)
जो ओषधियां मेरा यह स्तोत्र सुन रही हैं अथवा जो दूर चली गई हैं, वे सब एकत्र होकर
इस रोगी को शक्ति दें. (२१)
ओषधयः सं वदन्ते सोमेन सह राज्ञा. यस्मै कृणोति ब्राह्मणस्तं राजन् पारयामसि..
(२२)
ओषधियां राजा सोम के साथ इस प्रकार बातचीत करती हैं—"हे राजा! स्तोता ब्राह्मण
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