ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1747 of 1855
Read in contextमनै नु बभ्रूणामहं शतं धामानि सप्त च.. (१)
जो ओषधियां प्राचीन काल में तीन युगों में देवों से उत्पन्न हुई हैं, मैं मानता हूं कि वे पीले
रंग की ओषधियां एक सौ सात स्थानों में स्थित हैं. (१)
शतं वो अम्ब धामानि सहस्रमुत वो रुहः.
अधा शतक्रत्वो यूयमिमं मे अगदं कृत.. (२)
हे माता के समान ओषधियो! तुम्हारे जन्म सौ एवं तुम्हारे प्ररोहण हजार हैं. हे सौ कर्मों
वाली ओषधियो! तुम मुझे निरोग करो. (२)
ओषधीः प्रतिमोदध्वं पुष्पवतीः प्रसूवरीः. अश्वाइव संजित्वरीर्वीरुधः पारयिष्ण्वः.. (३)
हे फूल और फल वाली ओषधियो! तुम इस रोगी के प्रति प्रसन्न बनो. तुम अश्वों के
समान जयशील, उत्पन्न होने वाली एवं रोगियों को रोगों से पार करने वाली हो. (३)
ओषधीरिरिति मातरस्तद्द्वो देवीरुप ब्रुवे. सनेयमश्वं गां वास आत्मानं तव पूरुष.. (४)
हे माता के समान दिव्य ओषधियो! मैं तुम्हारे संबंधी वैद्य से इस प्रकार कहता हूं— “हे
चिकित्सक! मैं तुम्हें घोड़ा, गाय, वस्त्र एवं स्वयं को दे सकता हूं.” (४)
अश्वत्थे वो निषदनं पर्णे वो वसतिष्कृता.
गोभाज इत्किलासथ यत्सनवथ पूरुषम्.. (५)
हे ओषधियो! तुम पीपल के वृक्ष पर रहती हो एवं पलाश वृक्ष पर तुम्हारा निवासस्थान
है. जब तुम रोगी पुरुष पर कृपा करती हो, तब तुम गाय पाने की अधिकारिणी बनती हो. (५)
यत्रौषधीः समग्मत राजानः समिताविव. विप्रः स उच्यते भिषग्रक्षोहामीवचातनः.. (६)
युद्ध में एकत्र होने वाले राजा लोगों के समान जिस व्यक्ति के पास सभी ओषधियां
होती हैं, उसे ब्राह्मण या भिषक् कहते हैं. वह रोगों का नाश करता है. (६)
अश्वावतीं सोमावतीमूर्जयन्तीमुदोजसम्.
आवित्सि सर्वा ओषधीरस्मा अरिष्टतातये.. (७)
मैं इस रोग का विनाश करने के लिए अश्वावती, सोमवती, ऊर्जयंती, उदोजस आदि सभी
ओषधियों की स्तुति करता हूं. (७)
उच्छुष्मा ओषधीनां गावो गोष्ठादिवेरते. धनं सनिष्यन्तीनामान्मानं तव पूरुष.. (८)
हे रोगी पुरुष! ओषधियों से बल उसी प्रकार बाहर निकलता है, जिस प्रकार गोशाला से
गाएं बाहर जाती हैं. ये ओषधियां तुम्हें स्वास्थ्यरूपी धन देती हैं. (८)
ebook converter DEMO Watermarks*