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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1738 of 1855

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Page 1738

संवननं नाश्यं तष्टेवानपच्युतम्.. (१२)
देवशत्रुओं के भली-भांति विनाश के समान मेरा स्तोत्र ऋत्विज् इस प्रकार बढ़ावें, जिस
प्रकार सूर्य अपनी विस्तृत रश्मियों को बढ़ाता है. बढ़ई जिस प्रकार घोड़ों से खींचने योग्य रथ
बनाता है, उसी प्रकार मैंने यह स्तोत्र बनाया है. (१२)
वावर्त येषां राया युक्तैषां हिरण्ययी. नेमधिता न पौंस्या वृथेव विष्टान्ता.. (१३)
हम जिन देवों से धन पाना चाहते हैं, उनकी स्तुति बार-बार पढ़ते हैं. यह स्तुति सोने के
गहनों के समान प्रसन्नता देने वाली है. युद्ध में सैनिक जिस प्रकार आगे बढ़ते हैं अथवा रहट
के घड़े आगे चलते हैं, उसी प्रकार हमारे स्तोत्र बढ़ें. (१३)
प्र तद्दुःशीमे पृथवाने वेने प्र रामे वोचमसुरे मघवत्सु.
ये युक्त्वाय पञ्च शतास्मयु पथा विश्राव्येषाम्.. (१४)
जो देव पांच सौ रथों को घोड़ों से युक्त करके हमारे समीप आने की अभिलाषा से यज्ञ
के मार्ग में आते हैं. उन देवों से संबंधित स्तोत्र मैंने दुःसीम, पृथवान्, वेन एवं शक्तिशाली राम
के समीप बोले हैं. ये सभी राजा धनसंपन्न हैं. (१४)
अधीन्वत्र सप्ततिं च सप्त च.
सद्यो दिदिष्ट तान्वः सद्यो दिदिष्ट पार्थ्यः सद्यो दिदिष्ट मायवः.. (१५)
इन राजाओं से नान्व, पार्थ्य एवं मायव ऋषियों ने शीघ्र ही सतहत्तर गाएं मांगीं. (१५)
सूक्त—९४ देवता—सोम निचोड़ने के
पत्थर
प्रैते वदन्तु प्र वयं वदाम ग्रावभ्यो वाचं वदता वदद्भ्यः.
यदद्रयः पर्वताः साकमाशावः श्लोकं घोषं भरथेन्द्राय सोमिनः.. (१)
ये पत्थर शब्द करें, हम इन पत्थरों की स्तुति करें. हे ऋत्विजो! तुम शब्द करने वाले
पत्थरों की स्तुति करो. हे आदरणीय दृढ़ एवं सोमरस निचोड़ने में शीघ्रता करने वाले पथरो!
तुम एक इंद्र के लिए सुनने योग्य शब्द करो. हे सोमरसयुक्त पत्थरो! तुम सोम से तृप्त बनो.
(१)
एते वदन्ति शतवत्सहस्रवदभि क्रन्दन्ति हरितेभिरासभिः.
विष्ट्वी ग्रावाणः सुकृतः सुकृत्यया होतुश्चित्पूर्वे हविरद्यमाशत.. (२)
ये पत्थर सैकड़ों अथवा हजारों लोगों के समान शब्द करते हैं. ये सोमलता के कारण
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