ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1705 of 1855
Read in contextशत्रुपराभवकारी सबको देखने वाले, सहनशील एवं शक्तिशाली हो. तुम संग्राम में हमें ओज
प्रदान करो. (४)
अभागः सन्नप परेतो अस्मि तव क्रत्वा तविषस्य प्रचेतः.
तं त्वा मन्यो अक्रतुर्जिहीळाहं स्वा तनूर्बलदेयाय मेहि.. (५)
हे उत्तम ज्ञान वाले मन्यु! तुम्हारे यज्ञकर्म में भाग न लेने के कारण मैं युद्ध में शत्रुओं से
हारकर दूर आ गया हूं. मुझ यज्ञरहित ने तुमको क्रुद्ध कर दिया है. तुम शक्ति देने के निमित्त
मेरे शरीर में आओ. (५)
अयं ते अस्म्युप मेह्यर्वाङ् प्रतीचीनः सहुरे विश्वधायः.
मन्यो वज्रिन्नभि मामा ववृत्स्व हनाव दस्यूँरुत बोध्यापेः.. (६)
हे शत्रुओं को सहनशील एवं विश्व के धारक मन्यु! मैं तुम्हारा यज्ञ करने वाला सेवक हूं.
तुम मेरे पास आओ. हे वज्रधारी मन्यु! तुम मेरे पास आकर बढ़ो. तुम मुझे अपना बंधु
समझो. हम दोनों शत्रुओं को मारें. (६)
अभि प्रेहि दक्षिणतो भवा मेऽधा वृत्राणि जङ्घनाव भूरि.
जुहोमि ते धरुणं मध्वो अग्रमुभा उपांशु प्रथमा पिबाव.. (७)
हे मन्यु! मेरे पास आओ और मेरे दाहिनी ओर खड़े होओ. इस प्रकार हम दोनों बहुत से
शत्रुओं को मार सकेंगे. मैं तुम्हारे निमित्त मधुर धारक और उत्तम सोमरस का होम करता हूं.
हम दोनों एकांत स्थान में सबसे पहले सोमरस पिएं. (७)
सूक्त—८४ देवता—मन्यु
त्वया मन्यो सरथमारुजन्तो हर्षमाणासो धृषिता मरुत्वः.
तिग्मेषव आयुधा संशिशाना अभि प्र यन्तु नरो अग्निरूपाः.. (१)
हे मरुतों से युक्त मन्यु! तुम्हारे साथ एक रथ पर बैठकर जाते हुए प्रसन्न, धृष्ट, तीखे
बाणों वाले, आयुधों को तेज करते हुए एवं अग्नि के समान शत्रुओं को जलाने वाले नेता देव
हमारी सहायता के लिए युद्ध में आवें. (१)
अग्निरिव मन्यो त्विषितः सहस्व सेनानीर्नः सहुरे हूत एधि.
हत्वाय शत्रून्वि भजस्व वेद ओजो मिमानो वि मृधो नुदस्व.. (२)
हे मन्यु! तुम अग्नि के समान प्रज्वलित होकर शत्रुओं को जलाओ. हे सहनशील एवं
बुलाए गए मन्यु! संग्राम में हमारे सेनापति बनो. तुम युद्ध में शत्रुओं को मारकर उनका धन
हमें दो तथा हमें शक्ति प्रदान करते हुए शत्रुओं को मारो. (२)
ebook converter DEMO Watermarks*