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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1658 of 1855

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Page 1658

करो. हम उदित होते हुए सूर्य को बहुत समय तक देखें. हे अनुमति! अविनाश पाने के लिए
हमारी रक्षा करो. (६)
पुनर्नो असुं पृथिवी ददातु पुनर्द्यौर्देवी पुनरन्तरिक्षम्.
पुनर्नः सोमस्तन्वं ददातु पुनः पूषा पथ्यां३ या स्वस्तिः.. (७)
पृथ्वी हमें पुनः प्राण प्रदान करे. द्युलोक और अंतरिक्ष हमें पुनः प्राण दें. सोम हमें पुनः
शरीर प्रदान करें. पूषा हमें स्वस्तिकारक वाक्य दें. (७)
शं रोदसी सुबन्धवे यह्वी ऋतस्य मातरा.
भरतामप यद्रपो द्यौः पृथिवि क्ष्मा रपो मो षु ते किं चनाममत्.. (८)
महान् द्यावा-पृथिवी सुबंधु का कल्याण करें. उदक का निर्माण करने वाली द्यावा-
पृथिवी पाप को दूर करें. हे सुबंधु! द्यावा-पृथिवी के होते हुए कोई भी पाप तुम्हारी हिंसा न
कर सकें. (८)
अव द्वके अव त्रिका दिवश्चरन्ति भेषजा.
क्ष्मा चरिष्ण्वेककं भरतामप यद्रपो द्यौः पृथिवि क्ष्मा रपो मो षु ते किं चनाममत्..
(९)
स्वर्ग में जो दो या तीन ओषधियां विचरण करती हैं, उन में से एक जो धरती पर
विचरण करती है, वह सुबंधु की हिंसा दूर करे. हे सुबंधु! स्वर्ग एवं विस्तृत पृथ्वी तुम्हारे
अमंगल दूर करें एवं किसी प्रकार का अनिष्ट न करें. (९)
समिन्द्रेरय गामनड्वाहं य आवहदुशीनराण्या अनः.
भरतामप यद्रपो द्यौः पृथिवि क्ष्मा रपो मो षु ते किं चनाममत्.. (१०)
हे इंद्र! जो बैल उशीनर की पत्नी की गाड़ी ले गया था, उसे प्रेरित करो. हे सुबंधु! स्वर्ग
एवं विस्तृत पृथ्वी तुम्हारे अमंगल दूर करें एवं किसी प्रकार भी अनिष्ट न करें. (१०)
सूक्त—६० देवता—राजा असमाति आदि
आ जनं त्वेषसन्दृशं माहीनानामुपस्तुतम्. अगन्म बिभ्रतो नमः.. (१)
हम असमाति राजा के दीप्त एवं महान् पुरुषों द्वारा प्रशंसित जनपद में नमस्कार धारण
करते हुए गए. (१)
असमातिं नितोशनं त्वेषं निययिनं रथम्. भजेरथस्य सत्पतिम्.. (२)
हम शत्रुहंता, तेजस्वी, रथ के समान सबकी अभिलाषा पूर्ण करने वाले, भजेरथ को
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