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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1628 of 1855

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Page 1628

बताओ. मुझ युवती के घर में मेरा युवा पति निवास करता है. मैं केवल यही कामना करती हूं
कि मैं प्रिय, युवतियों को चाहने वाले एवं शक्तिशाली पति को प्राप्त करूं. (११)
आ वामगन्त्सुमतिर्वाजिनीवसू न्यश्विना हृत्सु कामा अयंसत.
अभूतं गोपा मिथुना शुभस्पती प्रिया अर्यम्णो दुर्याँ अशीमहि.. (१२)
हे अन्न एवं धन वाले तथा उदक के स्वामी अश्विनीकुमारो तुम्हारी कृपादृष्टि परस्पर
मिलकर मेरे समीप आवे. मेरे मन की अभिलाषाएं पूरी हों. तुम मेरे रक्षक बनो. मैं पति के घर
जाकर उसकी प्यारी बनूं. (१२)
ता मन्दसाना मनुषो दुरोण आ धत्तं रयिं सहवीरं वचस्यवे.
कृतं तीर्थं सुप्रपाणं शुभस्पती स्थाणुं पथेष्ठामप दुर्मतिं हतम्.. (१३)
हे प्रसन्न होते हुए अश्विनीकुमारो! मैं तुम्हारी स्तुति की अभिलाषा करती हूं. तुम मेरे
पति के घर में पुत्रादियुक्त धन स्थापित करो. हे जल के स्वामी अश्विनीकुमारो! जब मैं पति के
घर जाऊं तब तुम पानी के घाटों का जल पीने योग्य बनाओ. मेरे मार्ग में यदि कोई सूखा हुआ
वृक्ष या दुष्ट बुद्धि वाला व्यक्ति हो, तुम उसे भी हटाओ. (१३)
क्व स्विद्य कतमास्वश्विना विक्षु दस्रा मादयेते शुभस्पती.
क ईं नि येमे कतमस्य जग्मतुर्विप्रस्य वा यजमानस्य वा गृहम्.. (१४)
हे दर्शनीय एवं जल के स्वामी अश्विनीकुमारो! तुम आज किस जनपद और किन
प्रजाओं में आनंद पाते हो? किसने तुम्हें बांधकर रखा है एवं तुम किस बुद्धिमान् यजमान के
घर जाते हो? (१४)
सूक्त—४१ देवता—अश्विनीकुमार
समानमु त्यं पुरुहूतमुकथ्यं१ रथं त्रिचक्रं सवना गनिग्मतम्.
परिज्मानं विदथ्यं सुवृत्तिभिर्वयं व्युष्टा उषसो हवामहे.. (१)
हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारे पास एक ही प्रशंसित एवं बहुतों द्वारा आहूत रथ है. तीन
पहियों वाला वह रथ यज्ञों में जाता है. हम उस चारों ओर घूमने वाले एवं यज्ञ के लिए
हितकारी रथ को प्रतिदिन प्रातःकाल सुंदर स्तुतियों द्वारा बुलाते हैं. (१)
प्रातर्युजं नासत्याधि तिष्ठथः प्रातर्यावाणं मधुवाहनं रथम्.
विशो येन गच्छथो यज्वरीर्नरा कीरेश्चिद्यज्ञं होतृमन्तमश्विना.. (२)
हे सत्य का पालन करने वाले एवं नेता अश्विनीकुमारो! तुम प्रातःकाल घोड़ों से युक्त
होने वाले, प्रातःकाल चलने वाले एवं मधुकारक रथ पर बैठो. उसी रथ पर बैठकर तुम
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