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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1601 of 1855

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Page 1601

यह इंद्र का वज्र महान् सूर्य मंडल के नीचे वाले भाग से वर्षा के लिए गिरता है. इसके
अतिरिक्त अन्य भी स्थान हैं. स्तोता बिना किसी श्रम के उन स्थानों को पार कर जाते हैं.
(२१)
वृक्षेवृक्षे नियता मीमयद्गौस्ततो वयः प्र पतान् पूरुषादः.
अथेदं विश्वं भुवनं भयात इन्द्राय सुन्वदृषये च शिक्षत्.. (२२)
वृक्ष से बने हुए प्रत्येक धनुष पर चढ़ी हुई गाय की तांत की डोरी शब्द करती है. उससे
शत्रुओं का नाश करने वाले बाण निकलते हैं. उस समय इंद्र के लिए सोमरस निचोड़ता हुआ
एवं ऋषि के लिए यज्ञ की दक्षिण देता हुआ भी यह सारा संसार भय से कांपता है. (२२)
देवानां माने प्रथमा अतिष्ठन्कृन्तत्रादेषामुपरा उदायन्.
त्रयस्तपन्ति पृथिवीमनूपा द्वा बूबूकं वहतः पुरीषम्.. (२३)
देवों के निर्माण के समय ये बादल सबसे पहले देखे गए. इंद्र द्वारा इन मेघों के छेदन के
बाद जल ऊपर आया. पर्जन्य, वायु और सूर्य ये तीन धरती पर खड़े वृक्षों को पकाते हैं.
सबको प्रभावित करने वाले वायु और सूर्य सबको प्रसन्न करने वाला जल बरसाते हैं. (२३)
सा ते जीवातुस्त तस्य विद्धि मा स्मैतादृगप गूहः समर्ये.
आविः स्वः कृणुते गृहते बुसं स पादुरस्य निर्णिजो न मुच्यते.. (२४)
हे ऋषि! सूर्य ही तुम्हारे प्राणाधार हैं. तुम यज्ञ में सूर्य का यह स्वरूप जानो. उसे
छिपाना मत. सूर्य का वह गमन किरणों के रूप में जाकर लोक को प्रकाशित करता है. सूर्य
स्वर्ग का आविष्कार करते हैं एवं जल को सोखते हैं. सूर्य अपनी गति कभी नहीं छोड़ते.
(२४)
सूक्त—२८ देवता—इंद्र
विश्वो ह्य१न्यो अरिराजगाम ममेदह श्वशुरो ना जगाम.
जक्षीयाद्धाना उत सोमं पपीयात्स्वाशितः पुनरस्तं जगायात्.. (१)
इंद्र के पुत्र वसुक की स्त्री कहती है—“इंद्र के अतिरिक्त सभी देव हमारे यज्ञ में आए हैं.
मेरे ससुर इंद्र नहीं आए, यह आश्चर्य है. वे आते तो भुना हुआ जौ का सत्तू खाते और सोमरस
पीते. वे शोभन आदर करके फिर अपने घर चले जाते.” (१)
स रोरुवद्वृषभस्तिग्मशृङ्गो वर्षन्न्तस्थौ वरिमन्ना पृथिव्याः.
विश्वेष्वेवं वृजनेषु पामि यो मे कुक्षी सुतसोमः पृणाति.. (२)
इंद्र ने कहा—“मैं तीखे सींगों वाले बैल के समान गर्जन करता हुआ पृथ्वी के ऊंचे और
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